लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी सांसद और दिवंगत कांग्रेस नेता संजय गांधी के पुत्र वरुण गांधी ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे न केवल उनकी अपनी पार्टी में खलबली मच गई है बल्कि दूसरी पार्टियों के लोग भी चैंके हुए हैं।
पीलीभीत की एक चुनावी जनसभा में विवादित भाषण देकर हिंदू समाज के उग्रपंथियों के हीरो बनकर छा चुके वरुण गांधी ने शुक्रवार को प्रदेश की राजधानी में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसके लिए वीवीआईपी गैस्ट हाऊस वाले चैराहे पर अंग्रेजी और हिंदी में बड़े होर्डिंग लगाये गये थे। खास बात यह थी कि इन होर्डिंग में वरुण गांधी का नाम मोटे-मोटे हरूफ में फिरोज वरुण गांधी लिखा गया था। उनके पिता संजय गांधी फिरोज गांधी के पुत्र थे लेकिन खुद संजय गांधी तक ने कभी अपने नाम को कभी फिरोज गांधी के साथ नही जोड़ा। यहां तक कि संजय गांधी के बड़े भाई और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी अपने पिता के नाम से परहेज रखा।
लोग कयास लगा रहे हैं कि वरुण गांधी कटटर हिंदू नेता की अपनी छवि मिटाने के साथ-साथ नई पहचान उभारने की मंशा बना चुके हैं। इसी कारण उन्हें अपने दादा का नाम अपने साथ जोड़ने की जरूरत महसूस हुई। यह भी गौरतलब रहा कि संत गाडगे आॅडीटोरियम में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम के आयोजक एक मुसलिम नौजवान अब्बास हैदर थे। इस आयोजन में वरुण गांधी ने पीड़ा जताई कि अगर उनके नाम के साथ तिवारी या प्रसाद जुड़़ा होता तो उन्हें हांशिये पर कोई जुर्रत नही हो पाती। मुसलिम अस्मिता से जुड़कर वरुण गांधी ने जो खेल खेलने की मंशा जताई है उससे उनकी पार्टी के कर्णधारों को निश्चित रूप से धर्म संकट झेलना पड़ेगा।






Leave a comment