उरई। भारत की संसद ने देश के नागरिकों को 2005 में संसद द्वारा पारित सूचना का अधिकार आरटीआई जैसे महत्वपूर्ण कानून का अधिकार देकर अधिकार संपन्न बनाया था। लेकिन राज्य सरकार एवं स्थानीय निकाय के अधिकारी जनहित में मांगी गई सूचनाओं को न देकर आरटीआई का मखौल उड़ा रहे है। समय पर सूचना न देना आधी अधूरी सूचना देना उनकी आदतों में शु मार है ऐसे अधिकारियों को सूचना के कानून के दायरे में लेकर कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए आरटीआई एक्टिविस्ट पूर्व सदस्य जिला पंचायत रामशरण जाटव ने एक यहां जारी विज्ञप्ति में कहा कि विगत माहों में लोक निर्माण खंड-3 उरई के अधिशाषी अभियंता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस, अधिशाषी अभियंता नलकूप खंड द्वितीय से सूचना मांगी गई थी जो आज तक  उपलब्ध नही हुई है अपीलीय अधिकारी के निर्देश के बावजूद भी सूचना उपलब्ध नही हो रही है ऐसे अधिकारियों के खिलाफ जन सूचना अधिनियम की धारा 20(1), 20(2) के तहत जुर्माना व विभागीय कार्यवाही जैसे प्रतिकूल प्रविष्टि दी जानी चाहिए।
रामशरण जाटव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग तीन के अधिशाषी अभियंता एसपी ओझा आए दिन समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अभद्र व्यवहार करते है उनकी अनियमितताओं की शिकायत शासन स्तर पर की तो वह अपने चहेतों द्वारा धमकी व अभद्र व्यवहार कराने में आमादा है। उन्होंने पिछले माह एक ठेकेदार द्वारा फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के माध्यम से सरसई सेम मार्ग का अनियमित तरीके से लगभग ढाई करोड़ रुपये की निविदा देकर घोर अनियमिता की है। जिला प्रशासन से मांग है कि उक्त मार्ग में प्रयुक्त प्रमाण पत्र की जांच एक कमेटी द्वारा कराकर श्री ओझा के खिलाफ कूटरचना व फर्जी दस्तावेज को तैयार करने के आरोपों में आपराधिक धाराओ मे एफआईआर दर्ज करने की कार्यवाही करे। श्री जाटव ने जिलाधिकारी से अपील की है कि वह समस्त विभागों में लंबित आरटीआई की समीक्षा बैठक लेकर इस महत्वपूर्ण कानून का पालन करवाने में अपनी अहम भूमिका निर्वहन कर योगदान दे।

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