उरई(cmo। लिंग चयन के माध्यम से जन्म से पूर्व बहुत से परिवार लड़की के जन्म के लिए प्रयास करते है परिवार में जब एक शिशु का जन्म होने वाला होता है तो सबकी इच्छा पुत्र जन्म की रहती। लड़की चाहत में मां के पेट में पल रहे बच्चे का लिंग जानने का प्रयास किया जाता है और अगर लड़की होने पर उसे गर्भ में ही मार दिया जाता है। ऐसी बहुत सी कन्या शिशु है जिन्हे जन्म से महरूम रखा जाता यह खतरनाक आपराधिक प्रवृत्ति है इससे सभी को बचना होगा तभी बेटी बचाओ अभियान को आगे बढाया जा सकेगा।यह बात दीवानी न्यायालय सभागार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्ववाधान में आयोजित बेटी बचाओ संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश प्रदीप कुमार कंसल ने कही।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश ने कहा कि हम जन्म से पहले लड़कियों से किस तरह का भेदभाव कर रहे है यह भारत की जनगणना 2011 के आंकड़ों से देखा जा सकता है उत्तर प्रदेश में एक हजार लड़कों पर 101 लड़कियों की कमी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अशोक कुमार ने कहा कि गर्भ में पल रहे प्रत्येक कन्या शिशु को जन्म देने का अधिकार है जन्म के पूर्व गर्भपात नैतिक, सामाजिक धर्म है और कानून रूप से अवैध है। इस कुरीति की रोकथाम हेतु बेटी बचाओ बेटी पढाओ नामक योजना पूरे देश में लागू की गई। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सत्यप्रकाश ने लिंग चयन परीक्षण व अल्ट्रासाउंड सेंटर की वैधानिकता की जानकारी दी। डा. कल्पना ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के महत्व पर प्रकाश डाला। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रामअचल यादव ने बालिकाओं के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। गोष्ठी को डा. कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, जिला अधिवक्ता संघ के महासचिव ब्रजबिहारी गुप्ता ने भी संबोधित किया। सिविल जज सीडि अलका भारतीय ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अपर जिला जज श्रीनाथ सिंह, ऐके उपाध्याय, संजय कुमार सिंह, मनोज कुमार शुक्ला, नरेन्द्र कुमार, दिनेश तिवारी सिविल जज जूडि, मनोज कुमार जाटव, न्यायिक मजिस्टेªट
विवेक विक्रम, जिला कार्यक्रम अधिकारी कमलेश मौर्या, तहसीलदार सदर बीके राय, सह परिवीक्षाधिकारी, श्रीमती संध्या झा, बाल संरक्षण अधिकारी जूली खातून, वरिष्ठ अधिवक्ता यूसुफ इश्तियाक, रमाकांत द्विवेदी, शिवकुमार त्रिपाठी, राजकुमारी निषाद आदि लोग मौजूद रहे।

 

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