उरई। बुंदेलखंड में दीपावली के त्यौहार के दौरान मौन व्रत और गोवर्धन पूजा के बाद युवकों की टोलियों द्वारा दिवारी नृत्य करते हुए आसपास के सात मौजों की पदयात्रा का रिवाज इस आधुनिक युग में भी बरकरार बना हुआ है।
जिले के कई गांवों में मौनियों की टोलियां परवा के दिन भ्रमण करती हुईं देखी गईं। रंग-बिरंगा जाघिया पहने और सिर में मोर पंख लगाये मौनियों का जुलूस लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
इनके द्वारा किया जाने वाला दिवारी नृत्य भी अदभुत कौशल का नजारा पेश करता है। इसके तहत लाठी और डंडियों को लय पूर्वक लहराना और इसके बाद एक-दूसरे पर चढ़ते हुए लाठी के ऊपर पहुंचने का कौतुक दिखाना शामिल है। यह प्रदर्शन अब अजूबा की निगाह से देखा जाने लगा है। जिसकी वजह से पिछले कुछ वर्षों में नये जमाने की फैशनेबिल पीढ़ी दिवारी नृत्य से किनारा करने लगी थी लेकिन अब इसका क्रेज फिर बढ़ने लगा है। इसलिए आमतौर पर जींस और ट्राउजर पहनने वाले युवक दिवारी नृत्य में शामिल होने के लिए बड़े शौक से जाघिया का बाना मोर पंख धारण कर अपनाते दिखने लगे हैं। इस ट्रेंड के चलते दिवारी नृत्य और मौनिया टोली के जुलूस जिले के हर कोने में इस वर्ष पिछली बार की तुलना में काफी ज्यादा दिखाई दिये। जन समूह ने भी इनके नृत्य का आनंद लेने में श्रद्धामिश्रित भरपूर रुचि दिखाई।






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