कोंच-उरई। यहां बड़ी माता मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास पं. विष्णुकांत शास्त्री ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि बिना भक्ति के भगवान को पाना मुश्किल है। अगर ईश्वर को प्राप्त करना है तो भक्ति करना आवश्यक है। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा शिवार्चन भी किया जा रहा है।
कथा व्यास कहते हैं कि जिस प्रकार से जीवन में किसी ना किसी व्यक्ति अथवा किसी ना किसी वस्तु में प्रेम होता है उसी प्रकार से हम भगवान से प्रेम करें और परमार्थ के कार्यों में निरंतर लगे रहें क्योंकि भगवान भक्ति और प्रेम से ही प्रसन्न होते हैं। बाबा तुलसीदास ने राम चरित मानस में कहा भी है, सोहे ना राम प्रेम बिन ज्ञानू इसलिए भगवान भक्ति से ही प्रेम से मिलते हैं। शुकदेवजी महाराज ने परीक्षित को बताया कि पाण्डवों पर भगवान ने कैसी कृपा की थी कि भगवान कृष्ण स्वयं अर्जुन के सारथी बन कर रहे, महाराज युधिष्ठिर को अपना बड़ा भाई माना और उनकी हर आज्ञा का पालन करते थे। भगवान इतने दयालु हैं कि बिना बुलाये विदुर के घर पहुंच गये और विदुरानी द्वारा प्रेमातिरेक में खिलाये गये केले के छिलकों को ही प्रेमपूर्वक ग्रहण कर लिया। कथा में उपस्थित श्रोता जनों में बड़ी माता मंदिर के महंतश्री एवं कोंच नगर के विद्वान ज्योतिर्विद पं. संजय रावत, नवनीत शास्त्री, अनुज मिश्रा, रूपेश तिवारी, अनुभव, सागर वोहरे, पंकज तिवारी, अंकित गौतम आदि ब्राह्मण अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में लगे रहे।






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