उरई। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के शहीदों की याद में पचनद पर चंबल इलाके के दर्जन भर जिलों के बुद्धिजीवियों और जनसंगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं व अन्य प्रतिष्ठित जनों ने तिरंगा लहराकर उनके बलिदान को सलामी दी। इसके बाद बाबा साहब मंदिर के परिसर में चंबल से जुड़ी समस्याओं पर जन संसद का आयोजन किया गया जिसका संचालन बुंदेलखंड दलित मंच के संयोजक कुलदीप बौद्ध ने किया।
गौरतलब है कि जामिया मिलिया विश्वविद्यालय दिल्ली के स्कालर शाह आलम ने गत् वर्ष 1857 के गुमनाम क्रांतिकारियों की खोज के लिए चंबल के इलाके में 23 सौ किलोमीटर की साईकिल यात्रा की थी। जिसमें कई अछूते दस्तावेज व अन्य दुर्लभ सामग्री उन्होंने संकलित की। इस दौरान उन्होंने काकोरी कांड के नायक रामप्रसाद विस्मिल के मुरैना जिला स्थित गांव में उनकी स्मृति स्वरूप एक ऐसा पुस्तकालय स्थापित कराया जिससे पीढ़ियों तक विस्मिल के इतिहास को सहेजे रखने में सफलता हासिल करने की उम्मीद की गई है।
अपने इस अभियान की तार्किक परिणति के रूप में चंबल के गौरव की बहाली के लिए उन्होंने यहां की समस्याओं पर पहली जन संसद के आयोजन की पहल की और घोषणा की कि इस सिलसिले को वे हर साल जारी रखेगें। इस दौरान जन सांसदों ने इस बात को रेखांकित किया कि कंपनी शासन को सबसे ज्यादा चुनौती पहले स्वाधीनता संग्राम में चंबल इलाके में मिली थी। जिसकी वजह से फिरंगियों ने क्रांति के दमन के बाद बचे रह गये बागियों को राजनैतिक लड़ाका की बजाय डकैतों के रूप में दर्ज करने का आदेश जारी कराया इससे चंबल की बहुत ज्यादा बदनामी हुई। क्योंकि आजादी के बाद भी सरकार ने अन्याय और गलत व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वालों को डकैत घोषित करने का क्रम जारी रखा और जय प्रकाश नारायण के आग्रह के बावजूद चंबल में न्यायपूर्ण व्यवस्था कायम करने व विकास के जरिये इस इलाके की भौगोलिक दुर्गमता के निवारण के लिए सार्थक प्रयास नही किये। जन सांसदों ने कहा कि इस भूल सुधार के लिए जनमत बनाकर सरकारों को मजबूर किया जायेगा। कार्यक्रम में डाॅ. गोविंद सिंह, इंजी. राज त्रिपाठी, जानेमाने कवि अजय शुक्ला अंजाम, इतिहास के व्याख्याता डाॅ. जितेंद्र बरसारिया, वीरेंद्र सिंह सेंगर, प्रो. डाॅ. धर्मेंद्र, बीहड़ विकास मंच के संयोजक शैलेंद्र सिंह, जगम्मनपुर व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय द्विवेदी, डिग्निटी फाउन्डेशन के संयोजक भग्गू लाल बाल्मीकि, पत्रकार केपी सिंह, मनोज चैधरी, अनीता राज, संतोष वर्मा, रेहाना मंसूरी, नीलिमा, शीलिमा, अंकुश, संघरत्ना आदि ने प्रस्ताव रखे। आभार प्रदर्शन शाह आलम ने किया। लगभग 3 घंटे तक चली जन संसद में जालौन के अलावा औरैया, इटावा, भिण्ड, मुरैना, धौलपुर, मैनपुरी आदि जनपदों से सैकड़ों की संख्या में लोग जुटे।






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