
उरई। सिर्फ एक रूपये में कैंसर के इलाज की बात कोई करे तो यह सरासर गप लगती है। लेकिन इस दिशा में काम कर रहे एक शोधकर्ता के दावे पर विश्वास किया जाये तो मानना पड़ेगा कि बहुत जल्द कैंसर का इलाज लगभग बिना खर्च के सम्भव हो जायेगा। रसायन शास्त्र में पीएचडी कर चुके प्रवेश सिंह परमार स्थानीय रामश्री सीनियर सेकण्डरी स्कूल में रसायन शास्त्र के एचओडी हैं। पिछले कुछ वर्षों से वे कैंसर सहित हर तरह के बैक्टीरियल इंफेक्शन वाली कोमन दवा की ईजाद में लगे हैं। उन्होंने भीषण गंदगी में पनपने और बढ़ने वाले विस्मार जिसको आयुर्वेद में भ्रम्हरण्डी नाम से भी जाना जाता है पर काम किया है। इस पौधे का वानस्पतिक नाम एलोरेटम क्वानीज्वाइडस है। असाधारण प्रतिरक्षण क्षमता की वजह से जिस गंधगी में जीवन का अस्तित्व असंभव लगता है। उसमें यह पौधा अपना जीवट बनाये रखता है। प्रवेश सिंह ने इस पौधे में मौजूद एण्टीबेक्टेरिया का उपयोग करके अदभुद जीवन रक्षक दवा विकसित की है। इस दवा की ओरल डोज का परीक्षण एक हजार लोगों पर किया गया जो कि पूरी तरह कामयाब रहा। नेपाल की राजधानी काठमाण्डू में कम्युनिटी इण्टरनेशनल साइंस एसोसिएशन ने दो वर्ष पहले त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया था। जिसमें 44 देशों के शोधार्थियों ने भाग लिया था। इस सेमिनार में प्रवेश सिंह परमार ने पोस्टर प्रजेंटेशन के माध्यम से जब अपने शोध की जानकारी दी तो दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने उनकी सराहना करते हुए उनको भरपूर प्रोत्साहित किया। प्रवेश सन 2004 से इस रिसर्च में जुटे हैं। उन्होंने पूसा परिषद द्वारा राजधानी दिल्ली की फिजिकल लैवोरेटरी में आयोजित तृतीय अखिल भारतीय विज्ञान सम्मेलन में प्रजेंटेशन दिया था। उन्होंने हाल में ज्वाइडिस अ फास्ट एण्टीबैक्टेरिया के नाम से तैयार की गयी दवा का पेटेंट भी करा लिया है। जिसका व्यौरा गूगल सर्च इंजन पर भी खोजा जा सकता है। उन्हांेने बताया कि उनकी दवा सीरफ, कैप्सूल और इंजेक्शन तीनों रूप में उपलब्ध होगी। केवल एक रूपये के कैप्सूल को रोज खाने से कैंसर रोगी का स्थाई निदान करने की क्षमता का दावा अपनी दवा में किया है। उन्होंने बताया है कि कैंसर के अलावा क्षय रोग, निमोनिया और अस्थमा के लिए भी यह दवा रामबाण का काम करेगी।






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