उरई। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) उरई के प्रधानाचार्य एमके सिंह के भ्रष्टाचार पूर्ण कारनामों की शिकायत तहसील दिवस में करने के बाद जांच के दौरान छात्रों के आरोप सच साबित हुये तो जांच अधिकारी ने अपनी जांच आख्या जिलाधिकारी को प्रेषित करने के बाद अभी तक प्रधानाचार्य के विरुद्ध कार्यवाही अमल में न लाये जाने से आक्रोशित छात्रों ने आज विकास भवन पहुंचकर विकास कार्यों की समीक्षा करने आये जनपद के नोडल अधिकारी विशाल चैहान को प्रार्थना पत्र देते हुये मामले से अवगत कराते हुये जांच में दोषी ठहराये गये प्रधानाचार्य के विरुद्ध जल्द कार्यवाही किये जाने की मांग की है। गौरतलब हो कि आईटीआई उरई के छात्र विगत एक माह से प्रधानाचार्य एमके सिंह के द्वारा समय-समय पर छात्रों से कभी सेमेस्टर के नाम पर तो कभी पौधरोपण के नाम पर, कभी वाटर कूलर के नाम पर तो कभी प्रवेश के नाम पर इतना ही नहीं कभी-कभी को फर्नीचर की तोड़फोड़ जैसे आरोप लगाकर उनके आवासों के पतों पर तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड का नोटिस भिजवाकर छात्रों को ही नहीं बल्कि अभिभावकों को भी मानसिक रूप से परेशान करते चले आ रहे हैं। जब छात्रों ने उनकी काली करतूतों का विरोध किया तो उन्होंने मौखिक आदेश देकर आधा सैकड़ा छात्रों को कक्षाओं में बैठने से भी इंकार कर दिया। लंबी जद्दोजहद के बाद पीड़ित छात्रों ने जब तहसील दिवस में मामले की शिकायत दर्ज की तो मामले की जांच जिला विद्यालय निरीक्षक को मिली। उन्होंने मामले की जांच की तो उसमें आईटीआई परिसर का माहौल दूषित होने का स्पष्ट उल्लेख करते हुये कहा कि छात्रों के लगाये गये आरोपों की पुष्टि करते हुये अपनी जांच आख्या जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी। लेकिन अब तक जिलाधिकारी द्वारा मामले का संज्ञान लेने से छात्रों में भविष्य खराब होने की भावना घर करने लगी। इसी दौरान आज जनपद में आये जिले के नोडल अधिकारी विशाल चैहान जो कि विकास भवन सभागार में विकास कार्यों की समीक्षा के बाद जैसे ही बाहर निकले तो छात्रों ने उन्हें भी सारे मामले से अवगत कराते हुये प्रार्थना पत्र देते हुये स्वेच्छाचारी बने आईटीआई प्रधानाचार्य को तत्काल हटाये जाने की मांग की है। इस दौरान छात्र जितेंद्र, प्रदीप सिंह, दीपक, आशीष, सौरव, पारस दीक्षित, सौरब, अजमद, जितेंद्र चैधरी, राहुल, मृत्यंुजय, लोकेंद्र सहित आधा सैकड़ा से अधिक छात्र उपस्थित रहे।

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