उरई। यूपी इलेक्शन वाच एवं एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक्स रिफाम्र्स के संयुक्त तत्वावधान में गल्ला मंडी जालौन के परिसर में गल्ला व्यापारियों, पल्लेदारों तथा छनैया मजदूरों के साथ चुनाव सुधार संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वसम्मति से तय किया गया कि आगामी निकाय चुनाव में मतदाता चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों के सामने अपनी मांगों का मांगपत्र रखकर उनकी लिखित सहमति लेंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूपी इलेक्शन वाच के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा ने कहा कि हैरानी की बात है कि यूपी के विधायकों को सांसदों से ज्यादा वेतन भत्ते तथा पेंशन मिलती है। जबकि सांसद का कार्यक्षेत्र विधायक से कहीं ज्यादा होता है। विधायक को जहां करीब एक लाख पचानवे हजार वेतन व भत्ता मिलता है तथा 33 हजार पेंशन प्रतिमाह मिलती है। जबकि सांसद को एक लाख चालीस हजार वेतन भत्ता तथा 20 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन मिलती है। यह इसलिए हुआ है कि जनप्रतिनिधियों को अपना वेतन भत्ता बढ़वाने के लिए किसी आयोग की जरूरत नहीं होती है। न ही उन्हें मतदाता का भय होता है।
उन्होंने कहा कि जनता अपने सेवक (जनप्रतिनिधियों) के बारे में कुछ नहीं जानती है। न ही उसे बताया जाता है। वहीं दूसरी तरफ जनता मांगपत्र भी नहीं बनाती है। जिसके कारण जनप्रतिनिधि पर कोई जनदबाव या अंकुश नहीं रहता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का अंकुश जनप्रतिनिधियों पर रहता है। तभी तक सच्चा व अच्छा लोकतंत्र रहता है। इसलिए जरूरी है कि मतदाता जागरुक हो और अपने अधिकारों को समझे। उन्होंने कर्मचारियों की पेंशन बंद करने व जनप्रतिनिधियों की पेंशन बढ़ाने पर भी सवाल उठाए।
लोकतंत्र सेनानी एवं प्रसिद्ध साहित्यकार राधेश्याम योगी ने कहा कि नोटा को सभी प्रत्याशियों से ज्यादा वोट मिलते है तो उस सीट को रिक्त घोषित कर नए सिरे से चुनाव कराए जाए और चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों को फिर से चुनाव लडने से रोका जाए क्योंकि उन्हें जनता ने नकार दिया है। अभी तक इसके लिए कानून नहीं बना है। इसलिए जनता की मांग पर संसद में इस तरह का कानून बनाया जाए। श्री योगी ने कहा कि जनता कई सरकारें देख चुकी है। लेकिन भ्रष्टाचार अभी कम नहीं हुआ है। वे स्वयं 92 वर्ष की उम्र में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लडने को तैयार है। उन्होंने गल्ला व्यापारियों, पल्लेदारों व छनैया मजदूरों तथा युवाओं व महिलाओं का आह्वान किया कि भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में उस तरह से लामबंद हो, जैसे महात्मा गांधी व लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलनों में शामिल हुआ करते थे।
बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष प्रद्युम्न दीक्षित ने कहा कि सिर्फ घोषणाओं में नेताओं के कथनों में ही भ्रष्टाचार समाप्त हुआ है, हकीकत में चाहे जिस में विभाग में जाओ परेशान व्यक्ति को अपने काम के लिए आज भी सुविधा शुल्क देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ तथा जनप्रतिनिधियों पर जनदबाव बनाने के लिए लोगों को लामबंद होना होगा। गल्ला व्यापार संघ के नेता गिरीश गुप्ता ने कहा कि जनता न तो अपने जनप्रतिनिधि के बारे में कुछ जानती है और न ही उन्हें मांगपत्र देकर जनदबाव बनाने का काम करती है। इसके कारण जनप्रतिनिधि मनमर्जी के हिसाब से काम करते है। इसके लिए जनता को आगे आकर जनदबाव बनाने की लड़ाई लडनी होगी। गल्ला व्यापार संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र दीवौलिया, व्यापारी नेता रामकिशोर गुर्जर, आलोक खन्ना, अनुराग श्रीवास्तव, कौशल किशोर श्रीवास्तव, बबलू सिंह सेंगर, कमलेश चैरसिया, धीरज बाथम, भगवती मिश्रा, बौद्धिक कौंसिल ग्रुप के सचिव केसी पाटकार, गंगाराम चैरसिया, योगेंद्र राठौर, रिषभ गुप्ता, आकाश राठौर, सचिन कुमार, साहबुद्दीन, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के जिला महामंत्री मुहम्मद अय्यूब, अरुण कुमार, राधेश्याम वर्मा, अवधेश, संतोष, दीपक कुमार, केशराम पाल, मन्नू सिंह कुशवाहा, प्रयागनारायण प्रजापति आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस दौरान सर्वसम्मति से स्थानीय निकाय चुनाव में वार्ड प्रत्याशियों से लेकर नगर पालिका अध्यक्ष तक के प्रत्याशियों को मांगपत्र देकर उनसे सहमति लेने का निर्णय लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राधेश्याम योगी ने की। जबकि संचालन केसी पाटकार ने किया।

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