उरई। राजघाट बांध में पानी न रह जाने से नहरों का संचालन समय से पहले ठप्प हो गया। जिसके चलते गेंहूं की फसल सूखने की आशंका पैदा हो गई है। किसानों में इसे लेकर हाहाकार मचा हुआ है।
जनपद जालौन में अधिकांश खेती नहर के जरिये सिंचित होती है। गेंहूं की फसल के लिए इस समय पानी की जबर्दस्त मांग है जिसको देखते हुए 26 फरवरी तक नहरे चलाने का रोस्टर बनाया गया था। लेकिन राजघाट बांध में पानी न रह जाने से एक सप्ताह पहले ही नहरों का संचालन बंद कर दिया गया है।
बुधवार को विकास भवन में जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर की अध्यक्षता में आयोजित किसान दिवस के कार्यक्रम में यह मुददा जोरशोर से उठा। किसान नेताओं का कहना था कि अभी तो तीसरा पानी ही लग पाया है। जबकि गेंहूं की फसल के लिए पांच पानी की जरूरत होती है। अगर पानी न मिला तो गेंहूं के बीज के दाम तक नही निकल पायेगें।
जबाव में नहर विभाग के अधिशाषी अभियंता राकेश सचान ने कहा कि बांध में पानी न रह जाने से यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि अब केवल मई, जून के महीने में मवेशियों को पिलाने के लिए बांध में पानी सुरक्षित रखा गया है तांकि उनमें महामारी न फैले। इस पर किसान नेताओं ने कहा कि मवेशियों की बात तो बाद में आयेगी अगर अभी पानी न मिला तो किसानों के लिए तत्काल ही जीने-मरने का संकट पैदा हो जायेगा।
जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद अधिशाषी अभियंता ने कहा कि वे अधीक्षण अभियंता से बात करके कुछ दिनों और नहर चलवाने की कोशिश करेगें। बैठक में भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष साहब सिंह, किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम लंबरदार और प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन खासतौर से मौजूद थे।







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