हरदोई गूजर –उरई । हारजीत की बाजी में सब कुछ गंवाने के बाद एक युवक ने आखिरी बाजी में अपनी जिंदगी को ही मौत की बाजी में लगा दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घर ग्रहस्थी सब कुछ गवां कर अपने भविष्य की अनिश्चिता से डरकर हताशा की स्थिति में अपनी ससुराल में अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। जब तक उसके ससुरालियों ने बचाने की कोशिश की तब तक युवक गंभीर रूप से जल चुका था। गंभीर हालत में उसे सीएचसी माधौगढ़ में भर्ती कराया जहां उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए डाक्टरों ने जिला अस्पताल उरई भेज दिया। स्थिति ज्यादा गंभीर होने के कारण यहां से भी डाक्टरों ने उसे झांसी रिफर कर दिया। समाचार लिखे जाने तक पता चला कि झांसी से भी उसे ग्वालियर भेज दिया गया जहां वह जिंगदी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। अरविंद जाटव कस्बा हरदोई गूजर थाना एट का निवासी है। वह जुआ व नशा का आदी हो गया था जिसके चलते वह बर्बादी की कगार पर पहुंच गया था। पत्नी व घर वालों के बहुत समझाने के बावजूद भी वह अपनी आदतों को नही सुधार पाया तंगहाली व खर्चे से परेशान उसकी पत्नी से आये दिन टकरार होने लगी जिससे उसकी पत्नी अपने दोनों बच्चों को लेकर मायके चली गई। पत्नी के चले जाने पर अरविंद मानसिक अवसाद में आ गया। पत्नी को लेने वह अपनी ससुराल ग्राम गंथरा थाना रेढ़र 20 फरवरी को पहुंचा पत्नी को लिबा जाने के लिए ससुरालियों से जिद करने लगा लेकिन उन लोगों ने भेजने से साफ मना कर दिया। इससे अति उत्तेजना एवं आक्रोश में आकर अरविंद ने अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। एक अच्छे परिवार के युवक ने जुए नशे की लत में अपना जीवन बर्बाद कर दिया।
यहां एक अरविंद ऐसे ही हादसे का उदाहरण नही है बल्कि दर्जनों अच्छे खाते पीते सभ्रांत परिवारों के युवा इस बुरी लत के शिकार हुए जो अपना सब कुछ गवां कर या तो वेमौत मरे या अपनी पत्नी व बच्चों समेत पलायन कर गए। एक आंकड़े के अनुसार इस बुराई के शिकार हुए लगभग सौ ऐसे परिवार है जो कल तक लाखों करोड़ो की जायदाद के मालिक थे। आज उनके बच्चे दो जून की रोत के लिए तरस रहे है। लगभग बीस लोग इस बुराई के सदमे से मर गय या उन्होंने आत्माहत्या कर ली। यहां लगभग एक दशक से कुछ दबंग किस्म के लोग जुआ के अड्डों का संचालन कर रहे है। गैर जनपदों के लोग भी जुआ खेलने आते है। भोले भाले लोगों को भी ज्यादा मुनाफे की कमाई के लिए जुआ संचालक लोग खेलने के लिए उकसाते है। उनकी जायदाद तरफ लगी गिद्ध आंख उन्हें जुआ खेलने के लिए मोटी मोटी रकम उच्च ब्याजदर पर देते है। जो कुछ ही दिनों में तिगनी चैगनी हो जाती है जो उनकी जायदाद चल अचल संपत्ति से वसूली जाती है। विश्वासनीय सूत्रों की माने तो दबंग जुआ संचालक संबंधित थानों को पटाये रहते है उन्हें समय-समय पर मोटी रकमों के नजराना सुकराना भेजते रहते है जिससे उन्हें थाने की गतिविधियों मिलती रहती है। इस सामाजिक बुराई के बारे में यहां सभ्रांत नागरिकों एवं वरिष्ठजनों ने समय-समय पर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया। लोगों ने समाचार पत्रों के माध्यम से संबंधित थाना व अधिकारियों का कई बार ध्यानार्कषण कराया लेकिन आज तक इस सामाजिक बुराई के प्रति ईमानदारी से इसे रोकने के लिए कभ भी प्रयास नही किए गए।







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