अहम और संवेदनशील बैठक हुई फ्लाप
उरई। बुंदेलखंड के दोनों मंडलों में सर्दियों से गहराते पेयजल
संकट से गर्मियों में राहत देने के लिए जिला पंचायत सभागार में बुलाई गई
बैठक से कई जनप्रतिनिधि किनारा कर गए। ग्राम्य विेकास राज्यमंत्री
स्वतंत्र प्र्रभार डा. महेंद्र सिंह के नेतृत्व में कनिष्ठ मंत्रियों के
तीन सदस्यीय अध्ययन दल ने इसमें अंचल के सांसदों और विधायकों से चर्चा
करके जायजा लिया। बैठक का फीका माहौल देखकर महेंद्र सिंह ने मीडिया
कर्मियों को बैठक से बाहर निकलवा दिया। बाद में उन्होंने झांसी और
चित्रकूट दोनों मंडलों के आयुक्तों, जिलाधिकारियों व अन्य अधिकारियों के
साथ भी गहन चर्र्चा की।
बुंदेलखंड में पिछले मानसून में न के बराबर बारिश हुई। जिसकी वजह से
जलश्रोत सर्दियों में ही सूखने लगे। गर्मियों में जलसंकट की विकराल
स्थिति पैदा हो सकती है। इतने आपातकालीन हालातों को देखते हुए होना तो यह
चाहिए था कि वरिष्ठ मंत्रियों का दल इस पर बैठक के लिए भेजा जाता, लेकिन
कनिष्ठ मंत्रियों ने इसकी खानापूरी का प्रयास किया, जिसके चलते कद की
समस्या आ गई। पूर्व सांसद और राजनीति की राष्ट्रीय हस्ती में शुमार
गंगाचरन राजपूत के पुत्र व चरखारी विधायक ब्रजभूषण राजपूत और पूर्व मंत्री बिहारी लाल भी बेमन से
आए, इसलिए बैठक विलंब से शुरू होने के बावजूद काफी देर बाद वे इसमें शामिल हुए । मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जाने वाले परिवहन के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री भी बैठक में नजर नहीं आए।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी अपना कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा। सपा के
राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव की गिनती कद्दावर राष्ट्रीय नेताओं
में हैं। इसलिए उन्होंने भी अपने प्रतिनिधि को भेजकर बैठक को नजरअंदाज
कर दिया, इसके साथ ही भाजपा के ही विधायक जिनमें रवि शर्मा, मनीषा
अनुरागी और आरके सिंह पटेल शामिल हैंबैठक में नहीं पहुंचे। विधान
परिषद के अधिष्ठाता मंडल से शामिल और उच्च सदन के वरिष्ठ सदस्यों में एक
यज्ञदत्त शर्मा के भी आने का सवाल नहीं था। शिक्षक विधायक सुरेश चंद्र भी
नहीं आएं।
जनप्रतिनिधियों ने इसमें हैंडपंप और पेयजल परियोजनाओं की बदहाली को जो
खाका खींचा , उससे मंत्रियों के अध्ययन दल के हाथ पाव फूल गए। यह जाहिर
हो गया कि गर्मियों में बुंदेलखंड को बचाने के लिए पेयजल के अरबों रुपये
के पैकेज की जरुरत हैं। पूरे अंचल में सबसे कम समस्याग्रस्त माने जाने
वाले जालौन जिले तक में हजारों की संख्या में हैंडपंपों को रिबोर कराने
का बजट विधायकों ने मांगा। विधायकों ने पोल खोली कि जिन पेयजल परियोजनाओं
को कागजों में पूर्ण दर्शाया जा रहा हैं, वास्तव में वे अनुउपयोगी है।
जैसे नलकूप तो बन गए हैैं, लेकिन पाइप लाइन ही नहीं बिछी हैं। झांसी में
पथरीली जमीन के कारण हैंडपंप की बोरिंग नहीं हो सकती। जिससे यहां हैंडपंप
विकल्प नहीं हैं। विधायकों ने स्पष्ट किया कि झांसी में लोगों को पानी
किल्लत से रोकना है तो सतही जल से आपूर्ति की परियोजनाएं बनानी पडेग़ी।
जिनके लिए भारी भरकम बजट की जरुरत पडेग़ी। ललितपुर में लोग किलोमीटरों दूर
से पानी लाने कोमजबूर हैं। राज्यमंत्री मन्नू लाल कोरी ने कहा कि यह एक
गांव का किस्सा नहीं हैं। दर्जनों गांवों में यही हालात है। चित्रकूट
मंडल के सभी जिलोंं मेें अभी से हाहाकार मचा हुआ है। पेयजल का चारा न
देखकर गांव के गांव खाली होने लगे हैं। मंत्रियों के अध्ययन दल में डा.
महेंद्र सिंह के अलावा राज्यमंत्री सिंचाई बल्देव सिंह,,
राज्यमंत्री नगर विकास गिरीश चंद्र यादव शामिल रहे। बैठक में प्रमुख सचिव
नगर निगम, प्रमुख सचिव सिंचाई और प्रमुख ग्राम्य विकास को शामिल होना
था, लेकिन प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अनुराग श्रीवास्तव को छोडक़र दो अन्य
प्रमुख सचिव नहीं आए। अधिकारियों की बैठक में संबंधित विभागों ने
जनप्रतिनिधियों का हवाला देकर ज्यादा से ज्यादा बजट झटकने की फितरत
दिखाई।दरअसल कई वर्षों की परम्परा है कि पेयजल संबंधित परियोजनाओं का बजट
अधिकारी हजम कर जाते हैं। परियोजनाआे को अधर में छोड़ देते हैं। बाद में
उनकी कोई जबावदेही तय नहीं करता। जनप्रतिनिधियों ने जिन आधी अधूरी
परियोजनाओं की चर्चा की थी। मंत्रियों के अध्ययन दल ने अधिकारियों में उन
पर कुछ न कहकर उन्हें बेफिक्र बने रहने का अभय वरदान दे दिया, इसलिए
अधिकारी चाहते हैं कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा बजट मिले तो फिर से बड़ी
लूटखसोट का अवसर प्राप्त कर सकें। जाहिर है कि बैैठक में सबसे ज्यादा
संजीवनी का संचार अफसरशाही ने ही किया। इस दौरान स्थानीय अधिकारी मौजूद
रहे।
बैठक में मीडिया की रही नो-इंट्री
देश में चौथा स्तंभ कहे जाने वाली मीडिया भले ही सेतु का काम कर रही हो,
लेकिन पत्रकारों के प्रति अधिकारियों व नेताओं का रवैया सुधरता नजर नहीं
आ रहा है। इसकी बानगी रविवार को एक बार फिर शहर के जिला परिषद स्थित जिला
पंचायत भवन में देखी गई, जहां पर आयोजित समीक्षा बैठक में प्रदेश सरकार
के मंत्रियों के फरमान पर मीडिया को अधिकारियों ने यह कहकर जाने को कहा
कि बाद में प्रेस विज्ञप्ति भिजवा दी जाएगी। कवरेज से मीडिया को दूर किए
जाने पर आक्रोश देखा गया।








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