
माधौगढ़- उरई । सर्दी हो या गर्मी या बारिश की तेज बूंदें फिर भी खुले आसमान में रहने को मजबूर लौहपीटा बिरादरी पर सरकार की नजरें कब तरस खाएंगी? यही सवाल पूछने के लिए 2 दर्जन से ज्यादा लोहापीटा तहसील में तहसीलदार की चौखट पर पहुंचे थे। सरकार की तमाम योजनाएं गरीबों के लिए चलाई जाती है लेकिन समाज के सबसे वंचित तबके में शुमार किये जाने वाले इन लौहपीटा समुदाय की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। इन लोगों ने तहसीलदार कर्मवीर सिंह से शिकायती लहजे में कहा कि हम सभी वर्षों से बंगरा माधवगढ़ और रामपुरा में रह रहे हैं लेकिन आज तक सरकार ने,प्रशासन ने हमें न घर दिया न सरकारी पट्टा दिया। सरकार हमें सड़क से भी हटा देती है तो हम कहां जाएं? हुकुम,बबलू,अतर, गणपत,जीतू,सोबरन,कालू,मिथुन, शेरू, गब्बर,मलू, कुंदन आदि ने तहसीलदार से कहा हमें पट्टे दिए जाएं या आवास दिए जाएं ताकि हम भी अपना जीवन खुले आसमान से हटकर जी सकें। सभी ने प्रशासन से मांग की कि पट्टे और आवास के साथ उन्हें पेंशन भी दी जाए, उनके बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम भी कराया जाए ताकि उनके बच्चे भी पढ़ लिख कर उच्च पदों पर पहुंच सकें। हालांकि सच्चाई तो यही है कि इस समुदाय की ओर किसी ने सोचा ही नहीं। खुले आसमान में रहने को मजबूर और लोहे को पीटने से अपने परिवार का भरण-पोषण करना कितना मुश्किल होता होगा? यही दर्द लेकर यह अपनी फरियाद प्रशासन और राजनैतिक दलों से करते रहे पर कोई नहीं सुनता।






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