एट। एट में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है जहां सडक़ हादसे का शिकार हुए एक श्रमिक का शव घंटों तक हाइवे पर पड़ा रहा लेकिन सूचना मिलने के बावजूद भी पुलिस का कोई भी अधिकारी घटना स्थल पर नहीं पहुंचा जिससे शव हाइवे पर खुला पड़ा रहा। इस दौरान वहां से पुलिस की गाडिय़ां कई बार निकली लेकिन पुलिस मुंह मोड़ती हुई निकल गई। इस हादसे पर पुलिस के इस रूप की जमकर आलोचना हो रही है। यह मामला एट थाना क्षेत्र के एनटीपीसी के पास स्थित पेट्रोल पंप का है।
बता दें कि लाक डाउन के पचास दिन बीत जाने के बाद लोगों को काम नहीं मिल रहा है। इससे परेशान होकर कामगार मजदूर अपने अपने घरों के लिए जा रहे हैं। ऐसे में इन मजदूरों को अपने गृह जनपद पहुंचने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एेसे ही कुछ मजदूरों की टोली मुंबई से सुल्तानपुर के लिए डीसीएम से जा रही थी। जब उनकी डीसीएम एट थाना क्षेत्र के एनटीपीटी हाइवे स्थित पेट्रोल पंप के पास रुकी तभी थाना बुकनूर जिला सुल्तानपुर का रहने वाला पचास वर्षीय श्रमिक अली महमूद पुत्र मोहम्मद आमीन शौच के लिए हाइवे के किनारे गया हुआ था। जब वह लौटकर आ रहा था तभी सुबह पांच बजे  तेज रफ्तार से आ रहे डंफर ने उसको टक्कर मार दी जिससे उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई। इस घटना की जानकारी उसके साथ मौजूद श्रमिकों द्वारा पुलिस को दी गई लेकिन पांच घंटे बीत जाने के बावजूद भी एट थाना पुलिस मौके पर नहीं पहुंची और शव हाइवे पर क्षत विक्षत पड़ा रहा। मृतक के साथ मौजूद साथी तौफीक ने बताया कि घटना स्थल के पास से पुलिस की कई बार गाडिय़ां निकलती रही लेकिन किसी भी गाड़ी ने रुक कर घटना की जानकारी नहीं ली। कई घंटे बीत जाने के बाद पुलिस घटना स्थल पर पहुंची तब कहीं जाकर उसका पोस्टमार्टम कराया गया। इस घटना से साबित हो गया है कि एट पुलिस अपना फर्ज सही तरह से नहीं निभा रही है।
दो दिन पहले ही बदले गए थानाध्यक्ष
प्रवासी मजदूरों को रोके जाने का खामियाजा एट थानाध्यक्ष अरुण तिवारी को कुर्सी गंवाकर भुगतना पड़ा था। कप्तान ने गोहन थानाध्यक्ष विनोद मिश्रा को एट की जिम्मेदारी दी थी लेकिन पहली ही परीक्षा में नवागंतुक थानाध्यक्ष फेल हो गए और एक एेसा अमानवीय चेहरा सामने आया जिसकी हर तरफ आलोचना हो रही है। कोतवाली क्षेत्र में पांच घंटे सडक़ पर प्रवासी मजदूर का शव पड़ा रहा और जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार कोतवाल न ही खुद मौके पर पहुंचे और न ही किसी अधीनस्थ को मौके पर भेजा।
पुलिस का शर्मसार कर देने वाला रूप आया सामने
हाइवे पर डायल 100 और थाने की गाड़ी रात भर सायरन बजाती हुई दौड़ती हैं। ऐसे में एक परदेशी का शव हाइवे पर पड़ा रहा लेकिन किसी ने भी शव को सुरक्षित रखवाने और आगे की कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। एक ओर पूरे देश की पुलिस इस समय कोरोना योद्धा बनकर अपने परिवार से दूर रहकर सेवा भाव में जुटी है और गरीबों और भूखों को खाना खिला रही है तो वहीं दूसरी ओर एट पुलिस का एक एेसा भी मानवीय संवेदनाओं को तार तार करने वाला चेहरा सामने आया है। निश्चित तौर पर पुलिस कप्तान को इस मामले की गंभीरता से जांच करते हुए एेसे पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो इतनी बड़ी घटना की जानकारी होते हुए भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आए।

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