होम्योपैथिक डॉक्टरों के हाथों एलोपैथिक इलाज! रामपुरा सीएचसी में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का आरोप

रामपुरा-उरई। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रामपुरा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। क्षेत्रीय लोगों ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं और कथित अवैध चिकित्सकीय गतिविधियों को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए बड़ा खुलासा किया है। शिकायत के साथ ऐसे पर्चे भी संलग्न किए गए हैं जिनमें होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा खुलेआम एलोपैथिक दवाएं और पैथोलॉजी जांचें लिखी गई हैं। लोगों का आरोप है कि यह न सिर्फ नियमों का खुला उल्लंघन है बल्कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा गंभीर अपराध भी है।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में तैनात कई चिकित्सक होम्योपैथिक पद्धति से जुड़े हैं, लेकिन वे धड़ल्ले से एलोपैथिक दवाएं लिख रहे हैं। जबकि नियमानुसार होम्योपैथिक चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाएं लिखने अथवा पैथोलॉजिकल जांचें कराने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल में शासनादेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त सरकारी दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक चर्चित होम्योपैथिक चिकित्सक विशेष ब्रांड की दवाएं ही लिखते हैं, जो अस्पताल के बाहर चिन्हित मेडिकल स्टोर पर ही उपलब्ध रहती हैं। इससे कमीशनखोरी और सांठगांठ की आशंका भी गहरा गई है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में फार्मासिस्ट की भूमिका लगभग खत्म हो चुकी है। फार्मासिस्ट मनोज सचान पर ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा गया कि वे अधिकांश समय अपने कमरे में आराम करते हैं और कई बार केवल हस्ताक्षर कर चले जाते हैं। वहीं एमटीएस कर्मियों से इंजेक्शन लगवाने, बोतल चढ़वाने और टांके लगवाने जैसे काम कराए जा रहे हैं, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है।

सबसे चिंताजनक बात यह बताई गई कि मरीजों के पर्चों पर बीमारी का स्पष्ट उल्लेख तक नहीं किया जाता और न ही दवाओं की सही डोज लिखी जाती है। ऐसे में ग्रामीण मरीज अंदाजे और कर्मचारियों की सलाह पर दवाएं खाने को मजबूर हैं। शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ यह खतरनाक खिलवाड़ किसके संरक्षण में चल रहा है।

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल गरीबों के इलाज के लिए बनाए गए हैं, लेकिन यहां मरीजों की जेब काटने का खेल चल रहा है। बाहर की दवाएं लिखकर गरीब मरीजों को आर्थिक बोझ तले दबाया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवाएं लिखना सख्त मना है।

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