उरई। यू तों देश व प्रदेश की सरकारे गांव के विकास के लिये तरह-तरह की योजनायें चलाती हैं। लेकिन गांव में होने वाले फर्जीबाड़े से विकास की आयोजना सिर्फ कागजों मे ही सिमट कर रह गयी है। महेवा विकास खण्ड के मल्थुवा, चक, गहपुरा के ग्रामीणों के साथ लाला हरदौल परिसर में सामाजिक संगठन बुन्देलखण्ड दलित अधिकार मंच व बुन्देलखण्ड एक्शन ग्रुप के तत्वावधान में एक खुली जन पंचायत का आयोजन किया जिसमें गांव के लोगों ने अपनी अपनी समस्याओं को रखा और पिछले पांच वर्षों में हुई धांधली व फर्जीबाड़े की बात रखी।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां का पंचायत मित्र गांव में नही रहता जिससे धांधलियों को बल मिल रहा है। चूंकि उसकी नामौजूदगी के कारण उसे टोका-टाकी का सामना नही करना पड़ता। उन्होंने कहा कि ऐसे पंचायत मित्र को बर्खास्त किया जाये। ग्रामीणों ने सूचना अधिकार से ली गई जानकारी को भी जन पंचायत में रखा जिसमें फर्जी तरीके से धन निकासी की बात उजागर होती है। यह सूचनाएं बताती है कि जो लोग कभी काम नही करते, गांव में नही रहते उनके नाम से जाॅबकार्ड बनाकर पैसे हड़पे गये।
पानकुवर पत्नी रामप्रकाश व ओमकार ने बताया कि उन्हे शौचालय बनवाने के नाम पर सिर्फ 2 बोरी सीमेन्ट व ईंटा दे दिये है और गडडा खुदवा दिया गया है जिसमें गांव के पशु गिर कर मर जाते है क्योकि सीट न मिलने की वजह से गडढे खाली पड़े है। इन्दिरा आवास के लाभार्थी गंगा, विसुन, सुरेश, मुन्नेश, महाराज सिंह सहित दर्जनों लाभार्थियों को 15000 रू नही दिये गये और बताया जा रहा है कि उनका पैसा निकल गया है।
रामसेवक मुखिया पूर्व प्रधान ने कहा कि पहले लोग प्रधान बनने से कतराते थे आज लोगों में इसके लिए होड़ लगी है क्योंकि प्रधानपद सरकारी धन की लूट के लाइसेंस का पर्याय बन गया है। कमलेश त्रिपाठी व शिव सिंह बनाफर ने कहा कि हमारी पंचायत में फर्जी तरीके से लाखों की निकासी हुई है उसका सोशल आडिट एंव भैतिक सत्यापन हो व जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाये। नही तो हम सभी ग्रामीण जन आन्दोलन करेंगें। रामसुमिरन व महाराजसिंह गहपुरा ने कहा कि हमारे पुरवा में कोई काम नही हुआ जबकि कागजों में तमाम कामों पर खर्चा दर्शाया गया है। रिकार्ड में तालाब का सुन्दरीकरण करा दिया गया है जबकि तालाब के हालात बद से बदत्तर है। आज गांव में कोई काम नहीं चल रहा है दूसरी ओर पिछले कामों के भुगतान शेष पड़े है। इन स्थितियों के चलते मजदूर पलायन को भी मजबूर हो रहे है।
जन पंचायत में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। शिवराम पाल ने कहा कि लोगों का शिक्षित व जागरूक न होना इस लूट की मुख्य वजह है। के.के. प्रजापति व कालूराम प्रजापति ने कहा कि हम सभी को मिलकर अपने गांव के विकास में हिस्सेदार बनना चाहिये। महिलाओं को जागरूक करते हुये राजेश्वरी, रिहाना मंसूरी व नीलिमा ने कहा कि महिलाएं घर में ही कैद न रहें वे भी अब पंचायत में भाग लेकर अपने हक के लिये आगे आयें तभी गांव का विकास सम्भव है। बुन्देलखण्ड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि मंच अपने सभी साथी संगठनों के साथ गांव में जन पंचायतों के माध्यम से लोगों को अपने हक अधिकार के प्रति जागरूक करने का काम कर रहा है। गांव का विकास तभी संभव है जब गांव के लोग मिलकर प्रयास करेंगें व ग्राम विकास और निगरानी समिति बनाकर अपने गांव में होने बाले कायों की निगरानी करेंगें।
तय किया गया कि हर तीन माह में ऐसी बैठक होगी जिसमें ग्राम विकास के कार्यो की समीक्षा की जायेगी। इस दौरान एक्शन ग्रुप से शिवराम पाल, धर्मपाल राजपूत, नीलिमा, रीता विश्वकर्मा, मणिसेवा संस्थान से राजेश्वरी प्रजापति, के.के प्रजापति, रिहाना मंसूरी, महिला विंग से सीलिमा, लक्ष्मी गौतम, कमलेशी पाल, प्रगति सेवा संस्थान से सन्तोष कुमार गौतम, बी.डी.ए.एम. यूथ ग्रुप से नन्दकुमार, कमलेश त्रिपाठी, राजेन्द्र मुन्शी जी, सुरेश सचिव, रामसेवक पूर्व प्रधान, कैलाश सिंह पूर्व प्रधान, छिंग्गे सिंह पूर्व प्रधान, अजयपाल सिंह, गोविन्द प्रजापति, लल्लन, विमल, कुन्दन, अरविन्द पाल, राघौराम, शिववती, मालती, सरोज देवी, श्यामबाबू, मिश्रीलाल, रामनारायण पाल, रघुवीर, रतीराम, बाबूराम, मेवालाल, नेकराम, रामचरन, जागेश्वर, कल्लन पाल, भगवान दास, राम सुमिरन, रमेश सहित सैकडों लोग उपस्थित रहे।

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