उरई। खाद्य सुरक्षा कानून लागू तो कर दिया गया है लेकिन व्यवस्था के स्तर पर इसमें भारी अफरा-तफरी का आलम है। 1 लाख 89 हजार 251 राशनकार्ड धारकों को प्रति सदस्य के हिसाब से दो रुपये किलो पर साढ़े तीन किलो गेंहूं और तीन रुपये किलो से डेढ़ किलो चावल देने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। लेकिन 60 हजार आवेदक परिवारों को अभी भी जांच के नाम पर सस्ता गेंहूं, चावल हासिल करने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा नये फार्म भी जमा कराये जा रहे हैं हालांकि आॅनलाइन आवेदन स्वीकार नही हो रहे। जिला पूर्ति अधिकारी गिरीश शुक्ला का कहना है कि ओवर लोड की वजह से विभाग की बेबसाइट क्रेश हो गई है। कोटेदारों के भरोसे गरीब परिवारों के लिए कराये गये सर्वे में सरकार की मंशा का बंटाधार हो गया। उन्होंने वास्तविक रूप से पात्रता की श्रेणी में आने वालों के फार्म एक तरफ फेंक दिये और उनके पास पहले से जो बोगस राशनकार्ड थे उन्हें पात्रता सूची में दर्ज करा दिया। दो महीने से इनके नाम पर रियायती राशन चावल हड़पकर कोटेदार कालाबाजारी करते रहे। इस महीने डीएम ने जब 56 अधिकारियों को पात्रता सूची का भौतिक सत्यापन करने के लिए नियुक्त किया तो बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के मामले उजागर हुए। सत्यापन की प्रक्रिया जारी है और अभी तक 20 प्रतिशत लोगों के नाम सूची से हटाये जा चुके हैं। डीएम ने इसे देखते हुए शहरी क्षेत्र में नगर निकायों व ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिव अथवा तहसील में सीधे फार्म जमा करने की व्यवस्था घोषित कर दी है।
उधर कोटेदारों ने एक और खेल किया है। राशनकार्ड की प्रत्येक यूनिट के हिसाब से गल्ला-चावल देने की बजाय वे मनमानी कर रहे हैं। अगर ऐसा ही होता रहा तो गरीब भूखे के भूखे रह जायेगे और उनके हिस्से का गल्ला बीच में ही छूमंतर कर दिया जायेगा।
केस नं. 1-
माधौगढ़ तहसील का टीहर गांव जिसमें पात्रता सूची में रामपुरा के बड़े सर्राफ और पिछले कार्यकाल में प्रधान रहे आज्ञाराम सोनी की पत्नी मीना सहित ट्रैक्टर और अच्छी खासी जमीन के मालिक, सरकारी नौकरी करने वालों दो दर्जन लोगों के नाम पात्रता सूची में शामिल थे। जिन्हें एसडीएम एसपी अग्रवाल ने गांव सभा की खुली बैठक में जानकारी आने पर सूची से हटवाया।
केस नं. 2-
महेबा ब्लाॅक का गांव सतरहजू जहां के प्रधान बाबूसिंह के पास चार पहिया वाहन सहित तमाम सुख-सुविधाएं हैं। उनके पुत्र राम सुमिरन सिंह को पात्रता सूची में क्रमांक 105 पर दर्ज कर सस्ता गेंहूं, चावल दिया जा रहा था। कोटेदार परम सिंह की पुत्र वधू चांदनी का नाम भी पत्रता सूची में शामिल था। जबकि उनके पास ट्रैक्टर, लोडर जैसे कीमती वाहन हैं। महेबा के खंड शिक्षाधिकारी को इस गांव में सत्यापन के लिए भेजा गया उन्होंने सभी नाम ओके कर दिये। लेकिन बाद में कालपी में आयोजित तहसील दिवस में दर्जनों ग्रामीणों ने इनकी पोल खोली। अब खंड शिक्षाधिकारी कह रहे है कि खुली बैठक में उनके सामने किसी ने अपात्र नामों की शिकायत नही की थी। इसी गांव में ऊदल, वीरेंद्र, श्रीकृष्ण, छोटेलाल आदि गरीबों के नाम पात्रता सूची से हटा दिये गये। जबकि इनके नाम तो पहले से ही बीपीएल सूची में थे।
केस नं. 3-
ग्राम टीहर में प्रमोद के राशन कार्ड में 11 यूनिट दर्ज है जबकि जनवरी और फरवरी में कोटेदार ने केवल पांच यूनिट के हिसाब से राशन दिया। एसडीएम के सामने यह शिकायत की गई तो उन्होंने अगले महीने से पूरा राशन देने की ताकीद की। इसके बावजूद कोटेदार हठधर्मिता पर उतारू है। टीहर में यह अकेले प्रमोद का मामला नही है बल्कि कई राशन कार्ड धारक हैं जिन्हें पूरा राशन नही दिया जा रहा है। कोटेदार ने ग्रामीणों से साफ कह दिया कि एसडीएम साहब गल्ला तो दिलवा नही पाते, वह पूरा राशन कहां से दे। जितना दे रहा है उतना ही इस महीने भी दे पायेगा। उरई के मोहल्ला राजेंद्र नगर निवासी मनोज कुमार का नाम पात्रता सूची में नेट पर दिखाई देता है लेकिन कोटेदार का कहना है कि उसे जो सूची दी गई है उसमें तुम्हारा नाम नही है।
आकड़े-
सामान्य राशन कार्ड धारक- 3 लाख 31 हजार 163
बीपीएल कार्ड धारक- 61 हजार 343
अंत्योदय कार्ड धारक- 37 हजार 766
राशन कोटेदारों की संख्या- 752






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