उरई। डकोर ब्लाॅक के बंधौली बेतवा घाट पर मौरंग खनन को लेकर हुए महासंग्राम में गोली चलने की घटना की जांच जिला प्रशासन में परिस्थितियां बदल जाने से तेजी पकड़ रही है जिससे सिंडीकेट की घिग्घी अभी से बंधने लगी है।
बंधौली घाट पर पिछले माह हुई गोलीबारी में घायल तीन में से एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। इतने सनसनीखेज मामले के बावजूद गैंड़े से भी ज्यादा मोटी चमड़ी के धनी तत्कालीन अधिकारियों की सेहत पर बहुत फरक नही पड़ा था और कर्मकांडी जांच कराकर उन्होंने इस मामले का क्रियाकर्म करने की पूरी व्यवस्था कर ली थी। लेकिन शासन ने इसे बेहद गंभीरता से इसे संज्ञान में लिया और पहले एसपी इसके बाद डीएम को इस मामले में नाप दिया गया। इस कारण पूरा माहौल एक झटके में बदल गया है। नई जिलाधिकारी के तेवर देखने के बाद अपर जिलाधिकारी आनंद कुमार भी अपने रंग पर आ गये हैं। एडीएम इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच कर रहे हैं। गत् निर्धारित तिथि पर कोई भुक्तभोगी कुछ न होने की भावना की वजह से जांच में गवाही देने नही आया था। इस कारण एडीएम ने इसके लिए 28 मई को अपरान्ह 3 बजे तक बयान दर्ज कराने का समय तय कर दिया है। चूंकि अब कई लोग सामने आने को तैयार हो गये हैं इसलिए अनुमान है कि 28 मई को एडीएम के सामने ये लोग सप्रमाण मुंह खोलने के लिए प्रस्तुत होंगे। इस आफत से कैसे बचा जाये इसके लिए सिंडीकेट महामृत्युंजय यज्ञ कराने वाले एक दो नही बल्कि दर्जन भर से ज्यादा नामी गिरामी पंडितों की शरण में पहुंच चुके हैं। ईश्वरीय विधान से छुटकारा दिलाने की इतने मंत्र विधान हो तो फिर कोई पाप करके क्यों डरे।






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