0 सिर में मारा पत्थर
0 पुलिस की कार्यशैली से है खिन्न
0 एक दिन पहले कोतवाली में काटी थी हाथ की नस
cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। पुलिस द्वारा रिपोर्ट न लिखे जाने पर एक युवती ने पहले अपने हाथ की ब्लेड से नस काटने का प्रयास किया और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जाकर आज सिर फोड़ लिया। उसकी इस हरकत से जहां पूरा पुलिस महकमा परेशान हो गया वहीं उसने आरोप लगाया कि मेरे साथ दुराचार एवं जान से मारने के लिए प्रयास हुए। उसको लेकर आज तक मेरी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
पुलिस कार्यशैली से सशंकित युवती नीलू परिहार जो कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पीछे पटेल नगर में अपना आवास बनाए हुए है। विगत दिवस इसने सदर कोतवाली में अपनी गर्दन में एसआई के सामने ब्लेड मारने की कोशिश की। उसकी इस हरकत से मौजूदा एसआई ने झपट कर उसका हाथ पकड़ लिया जिससे उसकी गर्दन तो बच गई थी लेकिन इसके बाद उसने अफरा-तफरी के बीच हाथ में ब्लेड मार लिया था और खून छलक उठा था। किसी तरह महिला को महिला एसओ की सुपुर्दी में दिया गया। वहीं उसने आरोप लगाया कि दरोगा अनुराग के साथ गुड्डू चैहान धीरू निगम मोहन सिंह और दो अन्य लोगों ने उसके घर में घुसकर तोड़फोड़ व लूटपाट की। सारे घर को डरा-धमका कर दुष्कर्म कर डाला। चूंकि पुलिस इस मामले को संदिग्ध मान रही है। युवती के बवाल करने पर दबाव में कोतवाली में लूट और रेप का मुकदमा तो दर्ज कर लिया गया पर दरोगा अनुराग का नाम हटा दिया गया है। इस बीच पुलिस अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने से भी कतरा रही है इसीलिए पुलिस के इस रवैए से तृप्त होकर युवती कोतवाली आई थी और प्रभारी निरीक्षक आलोक सक्सेना को सबके सामने आरोपियों की गिरफ्तारी करने के लिए खरीखोटी भी सुनाने से नहीं चूकी। प्रभारी निरीक्षक युवती की इन हरकतों से निजात पाने के लिए दाएं-बाएं हो गए। इसके बावजूद पुलिस युवती को समझा-बुझा नहीं पाई जिसकी वजह से मामला अति गंभीर होता गया और वहीं युवती ने अपने पास रखे ब्लेड को निकालकर तेजी से गर्दन में मारने का प्रयास किया परंतु एसआई सतीश की सूझबूझ से उसकी यह हरकत धरी की धरी रह गई और कोई अनहोनी न हो जाए इसको लेकर पुलिस ने उस महिला से अपना पीछा छुड़ाया। परेशान महिला ने आरोपियों को गिरफ्तार कराने के लिए एक सोचीसमझी रणनीति बनाई। चूंकि उसने आत्महत्या करने का प्रयास किया जो कि स्वयं में एक जुर्म है लेकिन आज महिला फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पहुंच गई और अपनी आपबीती अपर पुलिस अधीक्षक को बताई। उन्होंने भी उसको बहुत समझाने का प्रयास किया परंतु उसने किसी की बात को तवज्जो नहीं दी। लगभग आधा-पौन घंटे पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उसने जमकर बवाल काटा और सिर में पत्थर मारकर यह बताने का प्रयास किया कि पुलिस जानबूझकर हमारे मामले से अनजान बनी हुई है। बेबसी में हम इस तरह की हरकत करने के लिए बाध्य हो गए।

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