जालौन-उरई
। मानव उत्थान सेवा समिति के द्वारा शिक्षण संस्था में बच्चों को शिक्षण सामग्री वितरित की गई। शिक्षण सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे खिले।
मानव उत्थान सेवा समिति के द्वारा मिशन एजूकेशन अभियान चलाया जा रहा है। उक्त अभियान के तहत सोमवार को स्थानीय मिशन काॅन्वेंट जूनियर हाईस्कूल में छात्रों के बीच शिक्षण सामग्री वितरित की गई। जिसमें छात्र छात्राओं को काॅपी, पेन, पेंसिल, रबर, कटर एवं ज्येमेट्री बाॅक्स निःशुल्क वितरित की गई। वहीं संस्था की ओर से बच्चों को लक्ष्मी बाई के जीवन दर्शन के बारे में अवगत कराकर उन्हें जीवन में संघर्षों से पार पाकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई। इस मौके पर प्रताप सिंह, सुल्तान सिंह गुर्जर, गंगाराम, मातादीन, सूरज प्रसाद, राजेश कुमार सहित प्रधानाध्यापक प्रवीन सक्सेना आदि उपस्थित रहे।
जालौन। दस रूपए के सिक्के को लेकर रिजर्व बैंक व एसडीएम के आदेश के बावजूद अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों एवं नगर क्षेत्र के कुछ मोहल्लों में अभी भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है।
जिसको मध्यम और छोटे तबके के व्यापारी फुटकर खरीददारी में ग्राहक लेने से मना कर देता है। ग्राहक दुकानदार से इस बात की भी बहस करता है कि सिक्का सरकारी है जिसको रिजर्व बैंक के आलना अध्ािकारियों ने स्पष्ट करि दिया है। कि दस का कोइ्र भी सक्किा नकली नही है। और न ही इसको चलन से बाहर किया गया है। इसके अलारवा उपजिलाधिकारी ने भी अपने स्तर से जानकारी करके प्रेस वामर्ता में व्यापारियों से दस रूपए का सिकका लेने की अपील की है। ना लेने पर कानूनी कार्य कीि बात भी कही है। जिसका आम जनता पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा है। आज भी पहले जैसी स्थिति बनी हुई है। मध्यम और छोटे व्यापारी का कहना है कि हमसे थोक व्यापारी सिक्का नहीं लेता है। वहीं, थोक व्यापारी लालन गुप्ता, राकेश ठाकुर, गब्बर यादव, महेश चैधरी का कहना है कि हमसे थोक माल विक्रेता सिक्का नहीं लेता है। वहीं थोक विके्रता घनश्याम, अमन चैरसिया एवं अन्य व्यापारी कहते हैं कि हम इसको कहां ले जाऐं। बैंक में भी रेजगारी और सिक्का जमा नहीं होता है। यदि सारी पूंजी को हम रेजगारी में लगा दें तो व्यापार कैसे होगा। बाजार में इस तरह के हालात सिक्के के लेनदेन को लेेकर हो चुके हैं कि कभी भी ग्राहक और दुकान दार के बीच झगड़ा फसाद की स्थिति बन सकती है। यद्यपि स्टैट बैंक के कैशियर आत्माराम गुप्ता ने सिक्के के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सिकके तथा रेजगारी को लेने के लिए बैंक बाध्य हैं, बैंक इसको लेने से मन ानहीं कर सकते। लेकिन हमारी मजबूरी है कि लगभग 10 लाख रूपए की रेजगारी हमारे पास मौजूद है उसको कहां ले जाऐं। यदि रिजर्व बैंक रेजगारी भंडार सभी बैंकों से लेने लगे तो हमें रेजगारी तथा सिक्का लेने में कोई एतराज नहीं है। आपको बता दें कि नगर के थोक व्यापारियों के पास लगभग 20 लाख रूपए की रेजगारी का स्टाॅक होगा। और उनकी आधी पूंजी रेजागारी में उलझ चुकी है। इसके पीछे भी कारण है। उनको मध्यम वर्गीय दुकानदार माल के बदले रेजगारी देना चाहता है रूपया नहीं देता है। तो थोक व्यापारी रेजगारी तथा सिक्का लेने के लिए मजबूर होता है। वहीं, उस रेजगारी को बोरियों में भरकर कानुपर बाजार में पांच से दस प्रतिशत कम में बेचने को मजबूर हैं। इस विकराल समस्या को लेकर शासन प्रशासन गंभीरता से विचार नहीं करता है तो एक दिन जनता बैंकों को सिक्का और रेजगारी लेने के लिए बाबाल करने पर मजबूर कर सकती है। और कोई बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। यह समस्या सिर्फ जनपद में ही नहीं बल्कि पूरा प्रदेयश इससे जूझ रहा है। जनता के बीच में अधिक रेजगारी का एकत्र होने का कारण वर्तमान में कोई सहालग नहीं होना है। तथा इस समय व्यापा भी धीमी गति से चल रहा है। यह भी एक कारण् हो सकता है। आमदनी के सा्रेत कम होने से आम आदमी बच्चों की गोलक में अथवा पास में मौजूद रेजगारी और सिक्का को बाजार में चलाकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है। जनहित में शाससन प्रशासन को इस समस्या का हल खोजना चाहिए। जिससे जनता को राहत मिल सके।
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