उरई। खुले में फारिग होने वालों के पास अपनी आदतों को लेकर हजार दलीलें हैं। उनका कहना है कि भीतर बंद होकर कोशिश भी की जाये तो पेट साफ नही होता और न ही मन भरता है। लेकिन उनका मन गया भाड़ में अब अगर उन्होंने अपनी आदत न बदली तो वे निगरानी समितियों की रडार पर रहेगें। उन्हें बार-बार टोका जायेगा और अगर उन्होंने यह सोचा कि वे चिकने घड़े की तरह इस मशक्कत को यूं ही बहा देगें तो फिर उन्हें इस तरह जलील करने का इंतजाम भी रहेगा जिससे वे घर के बाहर तक निकलना भूल सकते हैं।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत हर घर में शौचालय को सुनिश्चित करने की ठानी है। वैसे तो निजी शौचालय निर्माण को पिछले डेढ़ दशक से प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसमें अनुदान पर जितना बजट भेंट चढ़ चुका है उतने में तो पांच-छह वर्ष पहले ही कोई घर बिना शौचालय के न रह गया होता। लेकिन हालत यह है कि हर साल जब सर्वे किया जाता है तो बिना शौचालय वाले घरों की संख्या घटने की बजाय बढ़ती दिखती है।
शायद पहले सरकार इसको औपचारिकता में ले रही थी। लेकिन अबकी सरकार इस मूड़ में है कि किसी और में उसे दुनियां का सबसे मैडल मिले या न मिले लेकिन लैट्रिन मैडल वह अपने हाथ से बिल्कुल भी नही जाने देगी। सरकार इसी भावना के तहत सनातन धर्म इंटर काॅलेज में पिछले पांच दिनों से ग्राम पंचायत सचिवों और सफाई कर्मचारियों का प्रशिक्षण लैट्रिन के मोटीवेशन के लिए चलवाया जा रहा था जिसका आज समापन हो गया। इसमें पहले तीन दिन तो तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया इसके बाद उनको गिरथान, काबिलपुरा और जालौन ब्लाॅक के खजुरी ग्रामों में फील्ड सर्वे कराया गया। शुक्रवार को इस पर समापन समारोह आयोजित किया गया।
इस दौरान जिलाधिकारी संदीप कौर, जिला पंचायत राज अधिकारी सरफराज आलम, एनआरएलएम के उपायुक्त राठौर, परियोजना निदेशक श्रीकृष्ण पाण्डेय और स्वच्छता अभियान के जिला सलाहकार वरुण कुमार सिंह व ट्रेनर राजीव शर्मा ने संबोधन किया। अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण केवल जुबानी जमा खर्च में न रहे बल्कि इसके एक-एक हरूफ का अमल हो। इसके लिए कसी हुई कार्ययोजना बनाई गई है। प्रत्येक गांव में एक निगरानी समिति बनाई जायेगी जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल होगें। यह समिति सुबह खड़े होकर उन लोगों को तकेगी जो बाहर गांव शौच करके नीम की दातून दबांये खरामा-खरामा घर लौट रहे होगें। उन्हें अदब से बीच में ही रोक लिया जायेगा। कहा जायेगा भाईसाहब या बहनजी अमिताभ बच्चन साहब भले ही पैसे लेकर कर रहे हों लेकिन बाहर शौच के लिए जाने से होने वाली बीमारियों के बारे में आपको सचेत करने में बुढ़ापे के बावजूद कितनी मेहनत कर रहे हैं फिर भी आपका पेट बाहर जाये बिना साफ होने से इंकार क्यों करता है। आप अपने पेट को कुछ तो समझाइये। कई दिन इतना सुनने के बावजूद कोई अपनी धुन से टस से मस होने को तैयार ही न हो रहा हो तो उसके लिए शौच से आते ही उसका माल्यापर्ण करने का इंतजाम रखा जायेगा। तांकि वह सबके सामने इतना शर्मिंदा हो जाये कि फिर आदत की गुलामी को बदलने में ही उसे अपनी भलाई नजर आने लगे।







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