उरई। 70 वर्षीया वृद्धा के मार्केट को ढहाने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश में युवा अधिवक्ता हरिओम मिश्रा के कानूनी जौहर ने आखिर में ब्रेक लगा दिया। राजकिशोरी मिश्रा के लिए संकट मोचक बनकर आये हरिओम मिश्रा की सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में कानूनी दृष्टांतों से भरी प्रखर बहस न्यायिक गैलरी में चर्चा का विषय बनी रही। गोपाल गंज में 70 वर्षीया राजकिशोरी मिश्रा का मिश्रा मार्केट के नाम से 1952 में उनके द्वारा बैनामा कराये गये स्थल पर बाजार है जिसकी दुकानों का किराया उनके भरण-पोषण का एक मात्र जरिया है। इस मार्केट में कुछ अधिकारियों की अनुचित मांगों का पोषण न करने की वजह से राजकिशोरी मिश्रा को अतिक्रमण विरोधी अभियान में नोटिस थमा दिया गया। जिसमें कहा गया कि आप का मार्केट नजूल की जगह पर बना है। जिससे अवैध है और इसे आपके द्वारा स्वय ध्वस्त कर जगह खाली न करने पर नगर पालिका द्वारा बुलडोजर चलवाकर गिरवा दिया जायेगा और आपसे इसका हर्जाखर्चा भी वसूल किया जायेगा। आमतौर पर अदालतें अतिक्रमण विरोधी अभियान से जुड़े प्रार्थनापत्रों में हस्तक्षेप नही करती जिससे यह नोटिस मिलने के बाद राजकिशोरी मिश्रा के हौसले पस्त थे। फिर भी उन्होंने भाग्य अजमाइश की ठानी। उन्होंने नगर पालिका के सीनियर अधिवक्ता के सामने युवा अधिवक्ता हरिओम मिश्रा पर भरोसा किया। जिनकी कानूनी मामलों में काबलियत पर उम्र कम होने के बावजूद उन्हें बेहद भरोसा था। सिविल जज सीनियर डिवीजन और फास्टटेªक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार यादव की अदालत में इस मामले में अच्छी खासी कानूनी अखाड़ेबाजी की स्थिति बन गई। न्यायिक अधिकारी ने बहस को बहुत ही गंभीरता से सुना और इसके बाद निष्पक्ष विवेचन के उपरांत उभय पक्ष को विवादित स्थल पर यथा स्थिति बनाये रखने का आदेश उन्होंने जारी कर दिया। जिससे राजकिशोरी मिश्रा को पर्याप्त राहत मिल गई है। साथ ही हरिओम मिश्रा की कानूनी जानकारी का डंका भी अधिवक्ताओं के बीच बज गया है।





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