इटावा। अंबेडकर जयंती के अवसर पर चंबल संग्रहालय, पंचनद द्वारा बुद्धा पार्क में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी जीता चमार की स्मृति में जनसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन करने के साथ हुई।
स्मरण सभा को संबोधित करते हुए प्रोफेसर रमाकांत राय ने कहा कि देश के गुमनाम क्रांतिकारियों को मुख्यधारा में लाना हम सभी की जिम्मेदारी है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास के इन अनसुने नायकों को पहचान दिलाए बिना स्वतंत्रता संग्राम की कहानी अधूरी है।
दलित चिंतक कुसुम कांति ने कहा कि चंबल क्षेत्र के महापुरुषों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना समय की मांग है। उन्होंने चंबल संग्रहालय द्वारा वर्षों के शोध के बाद किए गए दस्तावेजीकरण को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।
प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि चंबल के क्रांतिकारियों को न्याय दिलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ठोस रणनीति बनाई जानी चाहिए। वहीं चंबल संग्रहालय के निदेशक चन्द्रोदय सिंह चौहान ने बताया कि चंबल के क्रांतिकारियों के सम्मान में भव्य स्मारकों के निर्माण के लिए एक महाअभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत गांव-गांव जाकर जनजागरूकता और समर्थन जुटाया जाएगा।
चंबल परिवार प्रमुख डॉ. शाह आलम राणा ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजी हुकूमत क्रांतिकारियों के नाम को मिटाना चाहती थी, उसी तरह आज भी कई गुमनाम नायकों को उचित पहचान नहीं मिल पा रही है। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।
सभा में वक्ताओं ने बाबा साहेब के विचारों से प्रेरणा लेते हुए शिक्षित, संगठित और संघर्षशील बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कवि सत्येंद्र देव सिंह आजाद, राम मिलन कठेरिया, राम बाबू वर्मा, सुभाष चंद्र बोस, नितिन डागौर, अरविंद सिंह, अंकित कुमार, मुरारी लाल पाण्डेय, शिवम कुमार, श्रीमती राजमणि चंद्रशेखर, शरद प्रकाश, कविदेव और विनोद सिंह गौतम सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुमार कुशवाहा ने किया। यह आयोजन प्रातः 10 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक लगातार चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।







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