उरई। ख्वाजा गरीब नवाज फाउंडेशन 21 नवंबर के आयोजन में सामूहिक विवाह कार्यक्रम की सार्थकता की मिसाल नई परंपराओं के साथ पेश करेगी। शुक्रवार को मु. मुही आजम के निवास पर फाउंडेशन के मुख्य पर्यवेक्षक केपी सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसके लिए कई सुझावों पर विचार विमर्श हुआ। मौलाना शफीक कादरी ने कहा कि शरीयत जैसा हुक्म देती है हमें वैसी जिंदगी गुजारनी चाहिए। इसलिए आयोजन ऐसा हो जो शरई मान्यताओं को उभारे। नियंत्रक इरशाद सेठ ने कहा कि कार्यक्रम को सादगीपूर्ण बनाया जायेगा तथा मात्र चार घंटे में सारी रश्में पूरी कर कार्यक्रम निपटा दिया जायेगा। निकाह कमेटी के इंचार्ज नौशे ठेकेदार ने कहा कि निकाह की बज्म में सामाजिक सरोकारों से जुड़े प्रभावी संदेश प्रसारित किये जायेगें साथ ही फाउंडेशन द्वारा नियुक्त काजी ही सभी निकाह पढ़वायेंगे। जनसंपर्क के इंचार्ज डाॅ. मुवीन अंसारी ने कहा कि गत् वर्षों की भांति इस वर्ष भी कोई बेनामी सहयोग स्वीकार न करने की बंदिश जारी रहेगी और आय-व्यय का लेखा विवाह के दौरान ही जारी करने की व्यवस्था की जायेगी। डाॅ. मुवीन ने चेतावनी दी जिन-जिन लोगों ने दान दाताओं की सूची में मोटी सहयोग राशि प्रकाशित कराके अभी तक रकम प्रदान नही की है वह विगत कार्यक्रम की बकाया राशि अविलंब पहुंचा दें अन्यथा ऐसे लोगों के नाम मजबूरी में लफ्फाज के बतौर समाज के सामने उजागर करने पड़ेगें। एक शोक प्रस्ताव द्वारा बैठक में विश्व प्रसिद्ध वनस्पति शास्त्री डाॅ. रफीक सिददीकी के इंगलेड के शहर लूटन में हुए असामायिक निधन पर गहरा दुख जताया गया। स्व. सिददीकी इंटरनेशनल जर्नल नेमोटोलाॅजी के संपादक भी थे तथा फाउंडेशन के सहयोगी मु. हारून पत्रकार के चचा थे। केपी सिंह ने अपनी अध्यक्षीय उदबोधन में कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारियों में बेहतर समन्वय पर जोर दिया। बैठक में का. जाकिर आजमी, सिराजुल हक, मु. मुही आजम, राजू मछली, गौरव गुप्ता, अखलाक अंसारी, सैयद शबाब हुसैन, मु. नजर आदि मौजूद रहे।

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