उरई। रामपुरा पुलिस जहां एक ओर वारदातों के खुलासे में नाकाम साबित हो रही है वहीं अवैध खनन को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। एसओ के कारखास सिपाहियों की इसमें पार्टनशिप तक की चर्चाएं सुनी जा रही हैं।
रामपुरा पुलिस की अवैध खनन में बदनामी सिर से ऊपर हो जाने के कारण ही पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने पूर्व थानाध्यक्ष को रुखसत किया था। लेकिन इसका चस्का ऐसा है कि मौजूदा थानाध्यक्ष जो कि पदोन्नति हो चुके हैं, भी अपने को इस रंग में रंगने से नही बचा सके। महटोली में रात को जमकर अवैध खनन होता है और ट्रैक्टरों से बालू ढोई जाती है। एक ट्रैक्टर से थाने में हर महीने 20 से 25 हजार रुपये लिए जाने की खबर है। रात में गश्त करने की बजाय पुलिस बालू के ट्रैक्टर निकलवाने में व्यस्त रहती है।
उधर मध्य प्रदेश से बालू भरे ओवरलोड ट्रकों व ट्रैक्टरों के संचालन के कारण नरौल से निनावली तक का रोड चैपट हो चुका है लेकिन कोई परवाह नही कर रहा है। पुलिस का ध्यान बालू में लगा रहने की वजह से अपराध नियंत्रण का कार्य शून्य हो गया है। जगम्मनपुर में हुई डकैती का पर्दाफाश 6 माह बाद भी नही हो पाया। रामपुरा में दो सप्ताह पूर्व सर्राफ के घर हुई चोरी के मामले में भी पुलिस खाली हाथ है। रविवार को निनावली रोड पर हुई लूट के मामले में पुलिस ने केवल मोटर साइकिल बरामद दिखाकर अपनी पीठ थपथपा ली है। पुलिस की इस कारगुजारी से जहां लोगों में निराशा है वहीं आक्रोश भी तेज होता जा रहा है।

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