उरई। बाहर के राज्यों में फसे जिले के लोगो के साथ लावारिसो जैसा बर्ताव हो रहा हैं। सरकार घोषणा कर रही है कि दूसरे राज्यों में अटके लोगों को उनके घर पहुचाने की व्यवस्था शुरू कर दी गयी है लेकिन उनके परिजन अधिकारियों के यहां परेशान हो रहे है क्योंकि प्रशासन को इस संबध में कोई दिशा निर्देश अभी तक उपलब्ध नहीं कराये गये।
जिले के सबसे बडे़ गांवोे में से एक 10000 की आबादी वाले कुठौन्द ब्लाक के वावली के एक दर्जन से अधिक लोग जो मिलों में काम करते है, लाॅक डाउन 1 से गुजरात के सूरत शहर में फसे हुए है। उनकी सारी जमा पूंजी भी खर्च हो चुकी है। अब वे सूरत में पेट की भूख शान्त करने तक के लिए तरस रहे है। सरकार की घोषणाओं से निश्चिन्त हुए उनके परिजनों ने स्थानीय अधिकारियों से उन्हें बुलाने के लिए मदद चाही तो अधिकारियों ने हाथ खडे़ कर दिये। जालौन के एसडीएम सुनील शुक्ला ने कहा कि वे अपने राज्य के बार्डर से यहां तक का पास तो बना सकते है। लेकिन सूरत से उन्हें बाहर निकालने की व्यवस्था पर उनका कोई जोर नहीं है।
माधौगढ के विधायक मूलचन्द्र निरंजन से भी गुहार लगाई जा चुकी हैैं। उन्होने कहा कि सूरत के जिलाधिकारी से आप लोगो को इसके लिए अनुरोध करना पडेगा। परिजनों ने मुख्यमंत्री के हेल्पलाइन नम्बर पर गुहार की तो पता चला कि लखनऊ में जिले का जो नक्शा है उसमें वावली तो क्या ब्लाक मुख्यालय कुठौन्द तक शो नहीं हो रहा। इस प्रवंचना से हताश सूरत मंे फसे लोगो के परिजन अपना माथा पीटने को मजबूर नजर आ रहे है।
रामनगर के इन्दौर मे फसे एक युवक के मां बाप भी बेटे के हालचाल पर बेहाल है। श्रीराम सिंह परिहार का 26 वर्षीय पुत्र शिवम सिंह परिहार इंदौर में बजाज एलयान्ज में कार्यरत है। लाॅक डाउन के बाद से उसका दफतर बन्द चल रहा हैं। उसके पास भी खाने पीने और खर्चे की व्यवस्था खत्म हो गयी है। उसके पिता श्रीराम अधिकारियों के दरवाजे खटखटा चुके है। पर उन्हे भी यही जबाब मिल रहा है कि इन्दौर का लोकल प्रशासन ही उसे अपने यहां से निकलने देने की व्यवस्था कर सकता है। जिले के अधिकारियों की निरूपायता से श्रीराम और उनकी पत्नी सदमें की हालत में है। पर कोई उन पर तरस खाने को तैयार नहीं है।






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