लखनऊ । प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र को आखिर फिर एक साल का सेवा विस्तार मिल गया है। इससे साफ हो गया है कि अगले लोक सभा चुनाव तक उत्तर प्रदेश में प्रशासन की बागडोर केन्द्र वर्तमान मुख्य सचिव के हाथ में ही रखना चाहता है।
पीएम के चहेेते अफसरों में होती है दुर्गाशंकर की गिनती
दुर्गाशंकर मिश्रा को बेहद काबिल और साफ सुथरी छवि का अधिकारी माना जाता है। मुख्य सचिव के रूप में उत्तर प्रदेश आने के पहले वे उत्तर प्रदेश में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे ओर प्रधानमंत्री के अत्यन्त भरोसेमन्द अधिकारियों में उनकी गिनती थी। इसी कारण पिछले वर्ष विधान सभा चुनाव के पूर्व उनके सेवा निवृत्ति का समय आ जाने के बाबजूद एक साल का सेवा विस्तार देकर उन्हें उत्तर प्रदेश में मुख्य सचिव का कार्यभार संभालने के लिये भेज दिया गया था। उन्होंने विरासत में जर्जर मिले उत्तर प्रदेश के प्रशासन के कील कांटे दुरूस्त करके अपने आपको पूरी तरह केन्द्र की उम्मीदों पर खरा साबित किया । विधान सभा चुनाव में सत्तारूढ पार्टी को मिली सफलता में प्रदेश में उनके द्वारा बनाई गयी प्रशासन की स्मार्ट छवि का भी बडा योगदान रहा । इसलिये आगामी लोक सभा चुनाव में किसी तरह की गफलत रोकने की गरज से उन्हें एक बार फिर सेवा विस्तार दिया गया है।
क्या यूपी की योगी सरकार खडाऊ सरकार है
धारणा बनती जा रही है कि उत्तर प्रदेश में योगी की खडाऊ सरकार का संचालन केन्द्र्र के रिमोट कंट्रोल से हो रहा है। केन्द्र ने सरकार की रखवाली के लिये पहले तेज तर्रार आईएएस अधिकारी अरविन्द शर्मा को प्रधानमंत्री कार्यालय से समय के पहले सेवानिवृत्त कर विधान सभा चुनाव के पहले भेजा था जो योगी को रास नहीं आया था। हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें योगी को अपनी कैबिनेट में शामिल करना पडा लेकिन वे इस भूमिका में फ्लाॅप साबित हो रहे हैं । डीजीपी के रूप में मुकुल गोयल की नियुक्ति भी केन्द्र ने ही उन्हें प्रतिनियुक्ति से वापस भेजकर विधान सभा चुनाव से पहले लखनऊ में कराई थी जिससे योगी चिढ गये थे और चुनाव होते ही तमाम आरोप लगाकर उन्हें चलता कर दिया था।
योगी के अवज्ञाकारी रूख को केन्द्र ने कैसे किया संतुलित
बाद में योगी के अवज्ञाकारी तेवरों को ठीक करने के लिये केन्द्र ने कडा रूख अपनाया । मुकुल गोयल की जगह डीजीपी बनाये गये देवेन्द्र सिंह चैहान की सघ लोक सेवा आयोग ने इस पद पर पुष्टि नहीं की जिससे उन्हें कार्यवाहक रहकर अपना सेवाकाल पूरा करना पड रहा है। उनके सेवा विस्तार के प्रस्ताव पर भी केन्द्र ने अडंगा लगा दिया । योगी के एक और चहेते अफसर और मुकुल गोयल के मामले में मंथरा की भूमिका निभाने वाले तत्कालीन अपर मुख्य सचिव गृृह अवनीश अवस्थी को भी केन्द्र से सेवा विस्तार न मिलने के कारण बेआबरू होकर हटना पडा । उन्हें मुख्यमंत्री ने अपना सलाहकार बनाकर पुर्नवासित करने की कोशिश की तो केन्द्र ने फिर मुश्के कस दीं जिससे सीएम के सलाहकार जैसा उनका कोई आभा मंडल नहीं बन पाया । अपर्णा यादव का भी हश्र इसी टकराव के चलते हुआ । योगी के एक और चहेते अफसर अमित मोहन प्रसाद को भी श्रीहीन करके जलावतन जैसी स्थिति में धकेल दिया गया है। इससे सबक लेकर अब योगी ने टकराव का रास्ता बदलकर केन्द्र के सामने विनीत मुद्रा अख्तियार कर ली है। हालांकि दुर्गाशंकर मिश्र की काबिलियत के कायल सीएम योगी खुद भी हैं । और माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में माहौल अब आॅल इज वैल का हो गया है।








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