डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद, फूल बंगला और विद्युत सजावट से सजेगा मंदिर परिसर
उरई, जालौन। ठड़ेश्वरी बाबा की पावन तपोभूमि और प्रसिद्ध श्री ठड़ेश्वरी हनुमान मंदिर में 22 सितंबर को बुढ़वा मंगल का पर्व श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। पर्व को लेकर मंदिर परिसर को फूल बंगला, आकर्षक विद्युत सजावट और रोशनी से सजाया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार तैयारियां अंतिम चरण में हैं और इस अवसर पर एक दिन में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
मंदिर के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर श्री सिद्धरामदास जी महाराज ने बताया कि श्रद्धालुओं को सुगमता और व्यवस्थित ढंग से भगवान हनुमान के दर्शन कराने के लिए प्रशासन के सहयोग से आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। दर्शन व्यवस्था के साथ आवागमन, सुरक्षा, प्रकाश और पेयजल जैसी सुविधाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
करीब चार सौ वर्ष पुरानी मानी जाती है धार्मिक परंपरा
स्थानीय मान्यताओं और उपलब्ध विवरणों के अनुसार श्री ठड़ेश्वरी हनुमान मंदिर की धार्मिक परंपरा करीब चार सौ वर्ष पुरानी मानी जाती है। स्थानीय परंपरा के मुताबिक संत ठड़ेश्वरी बाबा ने इस स्थान को साधना और तपस्या की भूमि बनाया तथा यहां हनुमान जी की आराधना की। इसी कारण यह स्थान आगे चलकर ठड़ेश्वरी बाबा की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
मंदिर की मुख्य गद्दी की परंपरा राजस्थान के रैवासा स्थित श्री अग्रदेवाचार्य आचार्यपीठ से संबद्ध बताई जाती है। मंदिर से जुड़े स्थानीय विवरण इसे संत परंपरा और रामानंदी वैष्णव परंपरा से जुड़ा धार्मिक केंद्र बताते हैं। हालांकि मंदिर की स्थापना का कोई निश्चित वर्ष उपलब्ध शिलालेखीय प्रमाणों से निर्धारित नहीं है, इसलिए इसकी प्राचीनता को स्थानीय परंपरा के आधार पर करीब चार शताब्दी पुरानी माना जाता है।
दक्षिणमुखी और पूर्वमुखी हनुमान स्वरूप हैं आकर्षण
महामंडलेश्वर श्री सिद्धरामदास जी महाराज के अनुसार ठड़ेश्वरी बाबा की तपोभूमि में दक्षिणमुखी और पूर्वमुखी श्री हनुमान जी के स्वरूप विराजमान हैं। धार्मिक परंपरा में दोनों स्वरूपों का विशेष महत्व माना जाता है और श्रद्धालु इनके दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में श्रीराम दरबार तथा भगवान शिव की आराधना की भी परंपरा रही है।
मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती के साथ बुढ़वा मंगल पर यहां विशेष भीड़ रहती है। बुंदेलखंड के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों और मध्य प्रदेश से भी श्रद्धालु इस अवसर पर उरई पहुंचते हैं।
ठड़ेश्वरी बाबा की तपोभूमि का प्रमुख उत्सव
बुढ़वा मंगल को ठड़ेश्वरी बाबा की तपोभूमि का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव माना जाता है। महामंडलेश्वर श्री सिद्धरामदास जी महाराज ने बताया कि इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं को व्यापक रूप दिया जा रहा है।
मंदिर से जुड़ी अनेक कथाएं स्थानीय धार्मिक परंपरा और लोक-आस्था का हिस्सा हैं। इनमें ठड़ेश्वरी बाबा की साधना तथा हनुमान जी की आराधना से जुड़ी मान्यताएं प्रमुख हैं। श्रद्धालुओं के बीच यह स्थान लंबे समय से आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है।
धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र
बुढ़वा मंगल का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-जोल का भी अवसर बनता है। मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के साथ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से दुकानदार और व्यापारी भी पहुंचते हैं। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजती हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ती हैं।
महामंडलेश्वर श्री सिद्धरामदास जी महाराज ने कहा कि ठड़ेश्वरी बाबा की तपोभूमि पर आयोजित यह पर्व श्रद्धालुओं, व्यापारियों और आमजन को जोड़ने का काम करता है। यह बुंदेलखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के साथ सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे को भी मजबूत करता है।
फूल बंगला और रोशनी से सजेगा मंदिर
पर्व के लिए मंदिर परिसर में विशेष सजावट की जा रही है। फूल बंगला और आकर्षक विद्युत रोशनी से मंदिर को भव्य स्वरूप दिया जाएगा। बुढ़वा मंगल के दिन विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन का क्रम जारी रहेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और प्रशासन के सामने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी






Leave a comment