उरई । सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने, यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने और सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं में अनमोल जिंदगियों को बचाने के उद्देश्य से जनपद जालौन में यातायात माह का शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी समीर और पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत के नेतृत्व में शुरू किए गए इस विशेष अभियान के माध्यम से जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता और नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। अभियान पूरे माह चलेगा और इसमें यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन तथा पुलिस संयुक्त रूप से काम करेंगे।

यातायात माह का उद्देश्य केवल वाहनों के चालान करना नहीं, बल्कि लोगों की आदतों में बदलाव लाकर सड़क दुर्घटनाओं को रोकना भी है। इसके लिए जागरूकता, यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने, सड़कों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में सुधार और दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

चार सूत्रों पर आधारित होगा अभियान

यातायात माह को प्रभावी बनाने के लिए 4-ई यानी इंजीनियरिंग, इंफोर्समेंट, एजुकेशन और इमरजेंसी केयर के सिद्धांतों पर काम किया जाएगा। इसके तहत सड़क सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में सुधार, यातायात नियमों का कड़ाई से पालन, नागरिकों को जागरूक करने और दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

अभियान के अंतर्गत यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने, मोटरसाइकिल पर तीन सवारी बैठाने, बिना नंबर प्लेट वाहन चलाने और निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार में वाहन दौड़ाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस ब्रेथ एनालाइजर और इंटरसेप्टर वाहनों की मदद से निगरानी तथा प्रवर्तन कार्रवाई करेगी।

पुलिस का प्रयास रहेगा कि वाहन चालक यातायात नियमों को केवल चालान से बचने का माध्यम न समझें, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए उनका पालन करें। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना और हेलमेट जैसे सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी अक्सर गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनती है। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ लोगों को इनके खतरों से भी परिचित कराया जाएगा।

स्कूलों से गांवों तक पहुंचेगा सड़क सुरक्षा का संदेश

यातायात माह के दौरान जनजागरूकता कार्यक्रमों को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। स्कूलों में विद्यार्थियों को यातायात नियमों, सड़क पार करने के सुरक्षित तरीकों, हेलमेट के उपयोग और वाहन चलाते समय सावधानियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही सड़क किनारे बसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अभियान के तहत पैम्फलेट वितरित कर लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा। खास तौर पर दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और वाहन के जरूरी दस्तावेज पूरे रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुख्य मार्गों पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही, सड़क पार करते समय सावधानी की कमी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा सकती है। ऐसे में अभियान का संदेश शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर गांवों तक पहुंचाने की योजना है।

‘गोल्डन ऑवर’ में मदद पहुंचाने पर विशेष जोर

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर उपचार मिलना उसकी जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यातायात माह के दौरान आपातकालीन सहायता व्यवस्था को लेकर भी जागरूकता बढ़ाई जाएगी। विभिन्न स्थानों पर आपातकालीन नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे, ताकि दुर्घटना होने पर लोग तत्काल सहायता मांग सकें।

दुर्घटना के बाद का शुरुआती समय, जिसे सामान्यतः ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान त्वरित चिकित्सा सहायता मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए लोगों को दुर्घटना की सूचना तत्काल संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने और घायलों को समय पर मदद दिलाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

प्रशासन और पुलिस की संयुक्त पहल

जिलाधिकारी समीर और पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन की प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यातायात नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और आम नागरिक सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को कितना गंभीरता से लेते हैं।

यातायात माह के दौरान कार्रवाई और जागरूकता के बीच संतुलन बनाते हुए सड़क सुरक्षा का व्यापक संदेश जन-जन तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य जिले की सड़कों को सुरक्षित बनाना, दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना और नागरिकों को जिम्मेदार वाहन चालक तथा सतर्क सड़क उपयोगकर्ता बनने के लिए प्रेरित करना है।

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