जिला कारागार के निरीक्षण में सचिव मनाली चंद्रा ने मांगी ऐसे बंदियों की सूची, जरूरतमंदों की जमानत और मुकदमों की पैरवी में मिलेगी कानूनी मदद
उरई। अदालत से जमानत मिलने के बावजूद जमानतगीर न होने के कारण जेल में बंद कैदियों की रिहाई का रास्ता आसान बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पहल करेगा। शुक्रवार को जिला कारागार उरई के साप्ताहिक निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण की सचिव मनाली चंद्रा ने जेल प्रशासन को ऐसे बंदियों की सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि उनकी रिहाई के लिए प्रभावी पैरवी की जा सके। आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों की जमानत की व्यवस्था भी नियमानुसार कराने की पहल की जाएगी।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर सचिव मनाली चंद्रा ने शुक्रवार, 6 नवंबर को जिला कारागार का भ्रमण किया। उन्होंने विभिन्न बैरकों में जाकर बंदियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। बंदियों की मुकदमों में पैरवी, विधिक सहायता और सलाह की स्थिति की भी पड़ताल की। उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं अथवा जिनकी न्यायालय में प्रभावी पैरवी नहीं हो पा रही है, उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
निरीक्षण के दौरान महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा, खान-पान सहित अन्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली गई। मुलाकाती स्थल पर बंदियों को उनके परिजनों से मिलते हुए देखा। यहां स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का भी निरीक्षण किया गया। सचिव ने कुछ बंदियों से अलग-अलग बातचीत कर उनकी समस्याएं पूछीं, हालांकि किसी ने कोई विशेष समस्या नहीं बताई।
प्ली बार्गेनिंग से समय और संसाधनों की बचत
निरीक्षण के बाद लीगल सर्विसेज डे और प्ली बार्गेनिंग स्कीम विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर की अध्यक्षता करते हुए मनाली चंद्रा ने बताया कि संविधान का अनुच्छेद 39-ए समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त विधिक सहायता उपलब्ध कराने तथा सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 14 और 22(1) भी कानून के समक्ष समानता और विधिक अधिकारों की रक्षा की गारंटी देते हैं।
सहायक एलएडीसी अभिषेक पाठक ने प्ली बार्गेनिंग की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि इसके माध्यम से लंबी सुनवाई से बचा जा सकता है। इससे न्यायालय का समय और संसाधन बचते हैं तथा अभियोजन पक्ष और आरोपी, दोनों को कुछ लाभ मिल सकता है। भारत में आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2005 के माध्यम से प्ली बार्गेनिंग की शुरुआत की गई थी।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक प्रशांत मौर्य, कारापाल प्रदीप कुमार, उपकारापाल अमर सिंह और सुखवती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक शुभम शुक्ला उपस्थित रहे।






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