रामपुरा-उरई। मनरेगा में वित्तीय अनुशासन अस्त-व्यस्त है। जिसका असर योजना के सुचारू संचालन पर पड़ रहा है। गड़बड़ाई वित्तीय व्यवस्था के कारण ही मनरेगा कर्मियों का समय से भुगतान नही हो पाता। ब्लाॅक क्षेत्र के मनरेगा कर्मी पांच माह से मानदेय के भुगतान की बाट जोह रहे हैं। आज मजबूर होकर मनरेगा कर्मियों ने ब्लाॅक में कार्य बहिष्कार कर अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
मनरेगा की फाइनेंशियल हैंडबुक अलग है लेकिन खर्चे अधिकारी मनमानी से करते हैं। जिससे वरीयता के कामों में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दुरुपयोग प्रशासनिक मद का हो रहा है। जिससे अधिकारी निजी उपभोग का सामान खरीद लेते हैं जबकि इसकी अनुमति नही है। नतीजतन संविदा कर्मियों के मानदेय भुगतान में फच्चर फस जाता है। रामपुरा ब्लाॅक में यही स्थिति है पांच महीने से ब्लाॅक के मनरेगा कर्मियों को भुगतान नही मिला जिससे उनके घरों में भुखमरी की नौबत आ गई है। आज 43 रोजगार सेवक, 6 टीए और 3 ब्लाॅक स्थापक मानदेय भुगतान के लिए अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठ गये। इस अवसर पर सभा आयोजित हुई जिसे मनीष कास्तवार एपीओ, सुरेंद्र प्रधान, राघवेंद्र कुमार, शैलेंद्र सिंह सेंगर, रामराज, सोमकांत, गोविंद सिहं आदि ने संबोधित किया। उधर प्रभारी खंड विकास अधिकारी प्रीति भसीन ने हठधर्मिता का रुख दिखाते हुए मनरेगा कर्मियों को मलहम लगाने की वजाय यह कहकर उन्हें और भड़का दिया कि वे पहले ब्लाॅक में लगी गाड़ी के डीजल और भाड़े का बिल तैयार करें उसके बाद ही उनका भुगतान हो पायेगा।







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