0 सबसे प्रचंड जीत रामपुरा में दिनेश रजक की हुई
0 महेबा में कांटे की टक्कर के बाद कांग्रेस विधायक समर्थित प्रत्याशी पराजित
IMG-20160207-WA0048उरई। समाजवादी पार्टी ने क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के चुनाव में जनपद में अपनी शानदार विजय पताका फहराई है। नौ ब्लाॅकों में से छह ब्लाॅकों में आज मतदान के बाद मतगणना कराकर तत्काल परिणाम घोषित कर दिये गये। जिनमें पांच स्थानों पर समाजवादी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी विजयी हुए हैं। तीन ब्लाॅकों में पहले ही सत्तारूढ़ पार्टी के प्रत्याशी निर्विरोध हो चुके हैं।
महेबा ब्लाॅक में चुनाव सर्वाधिक संघर्षपूर्ण माना जा रहा था जहां कांग्रेस विधायक उमाकांति सिंह के पति और स्वयं भी कई बार क्षेत्र पंचायत प्रमुख रह चुके सुरेंद्र सिंह सरसेला की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने भी साम-दाम-दण्ड-भेद से उन्हें नीचा दिखाने की ठान रखी थी। बात यहां तक बढ़ गई थी कि सुरेेंद्र सिंह सरसेला और उनके पुत्र अजयपाल सिंह के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया गया था। आखिर में समाजवादी पार्टी अपने मंसूबे में कामयाब रही। सीधे मुकाबले में सुरेंद्र सिंह सरसेला की प्रत्याशी शांति देवी को 26 मत ही मिले जबकि समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी नीतू चैधरी 31 मत पाकर उनके मुकाबले चार मतों से निर्वाचित घोषित की गई। उधर कदौरा में पूर्वानुमान के अनुसार विजय सिंह कुशवाहा निसबा 69 मत पाकर निर्वाचित हुए। उनके मुकाबले क्षेत्र के चर्चित युवा नेता परमानंद यादव की मां नैनकुंवर को सिर्फ 17 वोट ही मिल सके। विजय सिंह कुशवाहा को पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी का सिपहसलार माना जाता है जिसकी वजह से अनुरागी ने उनके लिए अपनी पूरी प्रतिष्ठा झोंक दी थी। इस जीत से अनुरागी के मुकुट में एक कलगी और लग गई है।
उधर कुठौंद में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिशुपाल सिंह यादव के नजीदीकी रहे श्याम यादव की पत्नी पुष्पा यादव 46 मत पाकर काफी अंतर से विजयी रहीं। दूसरे स्थान पर रहीं नीलम यादव को 23 मत मिले।
माधौगढ़ में भी सपा प्रत्याशी सोनिया राठौर विजयी रहीं। इस ब्लाॅक में 61 मतों में से 59 मत पड़े जिनमें सोनिया राठौर को 44 और उनके प्रतिद्वंदी अकल राजपूत को 14 मत मिले 1 मत अवैध घोषित कर दिया गया।
रामपुरा ब्लाॅक में 45 मे से 44 मत पड़े। जिसमें सपा प्रत्याशी दिनेश रजक को 39 मत मिले जबकि उनकी प्रतिद्वंदी ममता दोहरे को मात्र 4 मतो से संतुष्ट करना पड़ा यहां एक मत अवैध घोषित कर दिया गया। दिनेश रजक की जीत का मुख्य श्रेय सपा के दिग्गज नेता शीतल सिंह सेंगर को दिया जा रहा है। उन्होंने अपने गांव से दिनेश को निर्विरोध बीडीसी सदस्य निर्वाचित कराया था। इसके बाद चुनाव में सर्वाधिक मतों से विजय श्री दिलाकर उन्होंने क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ साबित की।
अलबत्ता नदीगांव में सपा को हार का स्वाद चखना पड़ा। इस क्षेत्र में संवेदनशील की स्थिति की वजह से भारी पुलिस, पीएसी के साथ तैनात की गई थी। चुनाव सम्पन्न होने तक एडीएम आनंद कुमार और एडीशनल एसपी शकील अहमद यहां कैंप करते रहे। यहां से समाजवादी पार्टी ने दुग्ध संघ के अध्यक्ष जमीपाल सिंह के पत्नी और कई बार ब्लाॅक प्रमुख रह चुके जगजोत सिंह जरा की पुत्र बधू डाॅली गुर्जर को उम्मीदवार बनाया था जिन्हें 39 मत मिलें। वहीं क्षेत्र के बाहुबली युवा नेता अभिमन्यु सिंह डिम्मपल समर्थित सावित्री देवी को 42 मत प्राप्त हुए और वे निर्वाचित घोषित की गईं। इस ब्लाॅक में चुनाव के पहले से ही प्रशासन के लिए दबाव की स्थितियां बन गई थी। कैलिया थाने में दो बीडीसी सदस्यों के खिलाफ लूट के मामले दर्ज होने का प्रकरण हाईकोर्ट की चैखट पर पहुंच गया था। जहां से जिला प्रशासन के लिए नोटिस जारी कर दिया गया था। इसलिए अधिकारी सतर्क रहे।
गौरतलब है कि जिले में नामांकन वापसी के दिन ही तीन प्रत्याशियों को उनके विरुद्ध कोई अन्य पर्चा न होने की वजह से निर्वाचित होने के प्रमाण पत्र थमा दिये गये थे। जिनमें डकोर से पूर्व जिला पंचायत के पुत्र तेजपाल सिंह, कोंच से नरेंद्र सिंह और जालौन से नगर पालिका अध्यक्ष के भाई तिलक जाटव शामिल हैं।
15 वोटर थे निरक्षर
महेबा ब्लाॅक में प्रशासन के लिए स्थिति सर्वाधिक असमंजसपूर्ण रही। इस ब्लाॅक में 15 बीडीसी निरक्षर थे। जिनके मतदान में दुरुपयोग की आशंकाएं जाहिर की जाने से अधिकारियों को सुचारू मतदान के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।

Leave a comment