IMG-20160207-WA0004उरई। विनायक एकेडेमी के चैथी कक्षा के 6 फरवरी से लापता छात्र के मामले में स्कूल और हाॅस्टल संदेह के घेरे में आ गया है। गायब छात्र के दादा ने आज कोतवाली में लिखित तौर पर उसके गायब होने की सूचना दी। जिसके बाद पुलिस द्वारा की गई पड़ताल में कई अनुत्तरित सवाल खड़े हो गये हैं जिनका जबाव न तो सही तरीके से स्कूल प्रबंधन के पास है और न ही हाॅस्टल संचालक के पास।
आटा थाने के ग्राम रिरुआ का रहने वाला योगेंद्र प्रताप विनायक एकेडेमी में चैथी कक्षा में पढ़ता है। जबकि वह राठ रोड पर ही स्थित संस्कार एकेडेमी की बोर्डिंग में रह रहा था। बोर्डिंग के चैकीदार का कहना है कि वह छह फरवरी को योगेंद्र सहित चार बच्चों को खुद विनायक एकेडेमी में छोड़कर आया था। दूसरी ओर विनायक एकेडेमी के प्रबंधन का कहना है कि योगेंद्र 6 फरवरी को स्कूल में लाया ही नही गया था।
योगेंद्र के दादा राकेश चंद्र द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद प्रभारी निरीक्षक आलोक सक्सेना पड़ताल के लिए स्कूल और हाॅस्टल दोनो जगह गये। उन्हें स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर में योगेंद्र के नाम के आगे ओवर राइटिंग मिली। ऐसा लगता है कि पहले उसे प्रजेंट दर्ज कर लिया गया था बाद में उसकी एबसेंट लगाई गई। हैरत करने वाली बात यह है कि बच्चे का तीन दिन से कोई पता नही है। लेकिन आज भी स्कूल की हाजिरी रजिस्टर में उसकी उपस्थिति दर्ज थी। प्रभारी निरीक्षक ने संस्कार बोर्डिंग में योगेंद्र की काॅपी देखी उसमें एक महीने से होमवर्क के नाम पर बच्चे ने कुछ नही किया था। फिर भी स्कूल के प्रबंधन ने उसके अभिभावकों को एलर्ट करने की जरूरत नही समझी। दूसरी ओर हाॅस्टल में भी लापरवाही और अव्यवस्था का बोलबाला पाया गया। चार कमरों में यह हाॅस्टल चल रहा है। जिसमें 25 बच्चे रहते हैं। उनके लिए बेडिंग की व्यवस्था बेतरतीब और असुविधापूर्ण है। एक पंक्ति में एक के ऊपर एक तख्तों के बेड बनाकर उन पर बच्चों को सुलाने की व्यवस्था की जाती है। हाॅस्टल में गंदगी का भी अंबार था। प्रभारी निरीक्षक आलोक सक्सेना का कहना है कि फिलहाल उनकी पहली प्राथमिकता बच्चे को खोजना है। बच्चे का बस्ता लापता होने के दिन ही मंडी की एक कैंटीन के बाहर मिला था। उस समय कैंटीन पर मौजूद लोगों का पता लगाकर उनसे भी जानकारी करने की कोशिश की जायेगी।

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