डीएम समीर की अनूठी पहल से जुड़ेंगी दो पीढ़ियां, साथ पढ़ने-खेलने और अनुभव साझा करने से मजबूत होगा अपनत्व का रिश्ता

उरई (जालौन)। जिन बुजुर्गों को अपनों के साथ की जरूरत है और जिन बच्चों को दादा-दादी के स्नेह व संस्कारों की दरकार है, उनके बीच रिश्तों का नया सेतु बनाने की पहल की गई है। जिलाधिकारी समीर की इस पहल का उद्देश्य वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों और बच्चों को आपस में जोड़कर ऐसा आत्मीय रिश्ता विकसित करना है, जिसमें बच्चे अपने चुने हुए बाबा-दादी के साथ पढ़ें, उन्हें पढ़ाएं, खेलें और उनके अनुभवों से जीवन की सीख लें।

इसी क्रम में जिलाधिकारी के निर्देश पर ‘हमारी उम्मीद मिशन’ से जुड़े बच्चों ने वृद्धाश्रम में लीफ आर्ट यानी पत्तियों से कलाकृतियां बनाने की गतिविधि में हिस्सा लिया। बच्चों ने अपनी पसंद से बुजुर्गों को दादा-दादी के रूप में चुना और उनके साथ बैठकर सुंदर कलाकृतियां बनाईं। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों के बीच स्नेह, संवाद और अपनत्व का भाव दिखाई दिया। पत्तियों से कलाकृतियां बनाने की यह गतिविधि दो पीढ़ियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने की दिशा में एक कदम बनी।

देखभाल के साथ परिवार जैसा माहौल देने की कोशिश

जिलाधिकारी समीर का जोर है कि वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों की देखभाल केवल दैनिक जरूरतों तक सीमित न रहे, बल्कि उन्हें बच्चों के साथ समय बिताने, अपने अनुभव साझा करने और परिवार जैसा माहौल महसूस करने का अवसर भी मिले। योजना के तहत बच्चे अपने चुने हुए बाबा-दादी के साथ पढ़ाई करेंगे, उन्हें पढ़ाएंगे और खेल-खेल में एक-दूसरे से सीखेंगे।

इससे बुजुर्गों के जीवन अनुभव बच्चों के काम आएंगे, वहीं बच्चों की ऊर्जा, जिज्ञासा और चंचलता बुजुर्गों के जीवन में खुशियों के नए रंग भर सकेगी। साथ बैठने और बातचीत करने से बच्चों को संस्कारों, पारिवारिक मूल्यों और जीवन के व्यावहारिक अनुभवों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

वंचित बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कारों से जोड़ने की पहल

‘हमारी उम्मीद मिशन’ की संचालिका अवंतिका तिवारी जरूरतमंद, मजदूर और वंचित परिवारों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के साथ शैक्षणिक सहयोग प्रदान करती हैं। जिलाधिकारी ने इसी मिशन से जुड़े बच्चों को वृद्धाश्रम के बुजुर्गों से जोड़ने की पहल की है, ताकि पढ़ाई के साथ उनमें सामाजिक संवेदनशीलता, सेवा, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की भावना भी विकसित हो।

यह पहल बुजुर्गों को सम्मान और अपनत्व देने के साथ बच्चों को संस्कारों से जोड़ने का संदेश देती है। दो पीढ़ियों के बीच नियमित संवाद और साथ बिताए गए समय से विश्वास व स्नेह का रिश्ता मजबूत होने के साथ वृद्धाश्रम में भी परिवार जैसा वातावरण विकसित करने की उम्मीद है।

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