Milky_way_broken_European (1)कालपी-उरई। हाईकोर्ट की आंखों में धूल झोंककर सोने के भाव बिक रही मौरंग का खनन करवाना प्रशासन को आसान साबित नहीं हो रहा है। यही वजह है कि प्रशासन अन्र्त विरोधी कार्रवाईयों के लिये मजबूर है। एक ओर तो अधिकारी ट्रक के हिसाब से कमीशन वसूल करने में परेशान रहते है दूसरी ओर हाईकोर्ट की तलवार लटकने की वजह से उन्हें समय समय पर अवैध खनन करने वाले छुटभैयों के खिलाफ कार्रवाई भी करनी पड़ती है। ताजा मामले में यहां के एसडीएम ने आधा दर्जन खनन कारोबारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
थाना कदौरा क्षेत्र के समसी गांव में बेतवा किनारे जोरों से खनन होने की शिकायतें हाईकोर्ट की चैखट तक पहुंचने से प्रशासन ने जब पानी सिर से ऊपर निकलते देखा तो नाम के अनुरूप ही गोरांग एसडीएम गोरेलाल शुक्ला ने अचानक वहां दविश भेज दी। प्रशासन का गिरगिटी रंग देखकर अधिकारियों के अभयदान प्राप्त मौरंग कारोबारी सकते में आ गये। ज्यादातर कारोबारी तो हवा की दिशा भापने में माहिर होने की वजह से नीलगाय की तरह चैकड़ी भरते हुये भाग निकले। जिनका पीछा करना थुल थुल एसडीएम के लिये मुमकिन नहीं था। लेकिन बली का बकरा बन गया बेचारा हमीरपुर का निवासी नफीस जिसे वाहवाही के लिये दविश मारने गयी टीम ने धर दबोचा। बाद में आधा दर्जन अन्य कारोबारियों के खिलाफ भी कदौरा थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
कुछ जानकार बता रहे है कि समसी में सक्रिय मौरंग भागीरथियों ने सिन्डीकेट के हिसाब में हेराफेरी कर दी थी जिससे सिन्डीकेट और अधिकारियों की भ्रकुटि में बल पड़ गये। इसके बावजूद सगर के उक्त आधुनिक वंशजों ने स्थिति को समझने की कोशिश नहीं की और उन पर कार्रवाई की गाज गिर गयी। गौरतलब है कि सतयुग में महाराजा सगर के वंशज ने आसमान से पुण्य सलिला गंगा के अवतरण में भूमिका निभाकर युगों युगों के लिये अमरता प्राप्त की थी लेकिन उनके मौजूदा वंशजों को नदी की बजाय मौरंग का अवतरण रास आ रहा है जो कि आसमान से उतरने की बजाय पाताल से निकाली जाती है और इसके लिये नये जमाने के विश्वकर्माओं ने जेसीबी और लिफ्टर जैसे दिव्यास्त्र उन्हें उपलब्ध कराये है।

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