27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ceमाधौगढ़-उरई। कई गांवों के किसान अब तक ओलावृष्टि और सूखे का मुआवजा मिलने की बाट जोह रहे हैं। तहसील प्रशासन की लापरवाही के चलते तमाम किसानों को सहायता के रूप में धेला भी नहीं मिल पाया है। जबकि जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि हर किसान तक सहायता राशि पहुंचनी चाहिए। किसान तहसील के चक्कर लगाकर परेशान हो रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
गौरतलब है कि बीते वर्ष अतिवृष्ट और ओलावृष्टि से किसानों की रबी की फसल तो तबाह हो ही गयी थी खरीफ की फसल में भारी नुकसान हुआ है। जिले में नुकसान का सर्वे कराया गया और जिला प्रशासन ने सरकार से किसानों को मुआवजा देने के लिए 267 करोड़ मांगा था। जिसमें लगभग 210 करोड़ रुपया आया और वितरित भी कर दिया गया लेकिन बदइंतजामी के चलते बहुत से किसान मुआवजा पाने से वंचित रह गये। यह गड़बड़ी तहसील स्तर से ही हुई है। लेखपालों ने इसमें जमकर अपनी मनमर्जी चलायी जिसका खामियाजा बहुत से किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मिझौना, अटागांव, कैलोर, रूपापुर, पड़कुला, गोपालपुरा सहित की गांवों के किसानों को धेला भी नहीं मिल पाया है। लाल जी प्रधान, अमर सिंह मास्टर, सत्येंद्र, विनय प्रताप, दौलत सिंह, शिवबालक ने बताया कि किसान पहले से ही परेशान हैं। सोचा था कि सरकारी कुछ सहायता मिल जायेगी तो परिवार के भरण पोषण का कुछ इंतजाम हो जायेगा लेकिन कुछ भी नहीं मिला। किसान आसरे में ही बैठे रहे। लेखपालों ने पहले अपने चहेतों के नाम सूची में डाल दिये और उनको चेकें थमा दी। जिनको वास्तव में मदद की दरकार थी उनको किनारे कर दिया गया। तहसील जाकर तमाम बार गुहार लगाई लेकिन अधिकारी कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं। अब जिलाधिकारी के यहां जाकर अपनी समस्या बतायेंगे तो शायद है कि समस्या का कुछ समाधान निकल सके। तहसील स्तर पर कुछ भी कहना सुनना बेकार है।

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