0 गल्ला व्यापारी समिति के तत्वाधान में जारी है श्रीमद्भागवत की मनोहारी कथायें
कोंच-उरई। स्थानीय गल्ला मंडी में संयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान विद्वान संत पं. राघवेन्द्र मिश्र जी महाराज ने व्यास पीठ से कथामृत पान कराते हुये कहा कि भगवान तो भक्त के वश में होते हैं भक्त की पुकार सुन कर वे दौड़े चले आते हैं। जैसे राजा बलि भगवान में पूर्ण आसक्त था और भगवान ने उसके यहां पहरेदारी करना भी स्वीकार किया। कथा प्रवक्ता ने प्रह्लाद चरित्र, गजेन्द्र मोक्ष और परमात्मा के विभिन्न अवतारों की मनोहारी और प्रेरणास्पद कथायें सुनाईं।
गल्ला मंडी में नीलामी चबूतरे पर जारी श्रीमद्भागवत सप्ताह के अंतर्गत कथा व्यास ने कहा कि प्रभु चरणों में अनुराग और निष्ठा के ही प्रभाव से प्रह्लाद जैसे भक्त के कष्ट दूर करने के लिये भगवान ने स्तम्भ से प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिये और उनके पिता महान अत्याचारी हिरण्यकश्यपु को मोक्ष प्रदान किया। दैत्यों का राजा बलि एक महान दानवीर था किंतु इसका उसे बहुत ही अहंकार हो गया तब अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिये भगवान नारायण ने वामन रूप धारण किया और उन्होंने बलि से तीन पग पृथ्वी दान में मांग ली। अहंकारी बलि ने उसे तीन पग पृथ्वी सहर्ष ही दान में देने के लिये अंजुलि में जल लेकर संकल्प ले लिया, किंतु दो पग में ही सारा ब्रह्माण्ड भगवान वामन ने नाप लिया और बलि का अहंकार नष्ट किया। तब बलि ने तीसरा पग अपने मस्तक पर रखने का आग्रह किया। राजा बलि से भगवान इतने प्रसन्न हुये कि उसके यहां पहरेदारी करना भी उन्होंने स्वीकार कर लिया। कथा व्यास कहते हैं कि व्यक्ति को दान करते समय अहंकार का भाव नहीं रखना चाहिये। कथा व्यास ने गजेन्द्र मोक्ष और मत्स्यावतार, कूर्मावतार, नृसिंह अवतार सहित भगवान के विभिन्न अवतारों की मनोहारी कथायें सुनाईं। कथा व्यास कहते हैं कि भगवान का अवतार भक्तों के लिये होता है, दुष्टांे के लिये भगवान अवतार नहीं लेते हैं। दुष्टों का अंत तो उनकी दुष्टता के कारण ही हो जाता है। कथा व्यास की सहधर्मिणी राम कथा प्रवाचिका अंजनेश्वरी देवी के संगीतमय भजनों पर भक्त झूम उठते हैं। परीक्षित की भूमिका में आनंद गुप्ता लोहई बाले ने सपत्नीक भागवत जी की आरती उतारी।






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