उरई। सूखे की आपाधापी से त्रस्त जनजीवन को राहत के लिए शासन द्वारा जनपद में प्रशासन की पैनी निगहबानी की जा रही है। इसके नतीजे में प्रशासन अपनी मुस्तैदी दिखाने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहा। इस क्रम में मुख्य विकास अधिकारी ने शनिवार को खंड विकास अधिकारियों के साथ मनरेगा को तेजी से चलाये जाने के एजेंडे पर बैठक आयोजित की।
लगातार खेती की बर्बादी ने किसानों को पस्त कर दिया है। गांव भुखमरी का सामना करते हुए पलायन की वजह से उजड़ते जा रहे हैं। सरकार तक जो फीड बैक पहुंच रहा है उसकी दारुण तस्वीर ने रहनुमाओं को झकझोर कर रख दिया है। इस हालत में मानवीयता और संवेदनशीलता का परिचय देने के लिए शासन से जिले में नये-नये निर्देशों के सरकुलर पर सरकुलर आकर गिर रहे हैं। यह दूसरी बात है कि इसके बावजूद असलियत में प्रशासन को ज्यादा परवाह नही है। भुखमरी की चपेट में घिरे परिवारों के खाने-पीने के लिए शासन ने जो बजट भेजा था उससे तहसीलदारों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि उनके क्षेत्र में किसी परिवार की हालत खराब नही है। इसी तरह वेजुबान मवेशी भूख से मर रहे है लेकिन उनके चारे के लिए आया बजट अधिकारी सरकारी खजाने में पूजने के लिए यथावत रखे हुए हैं।
पलायन रोकने के लिए गांव में जरूरतमंदों को रोजगार की व्यवस्था के लिए फुर्ती दिखाने के भी निर्देश शासन ने जारी कर रखे हैं। इसको देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह खंड विकास अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि मार्च का महीना आने को है इसलिए वर्तमान वित्तीय वर्ष का लेबर बजट अधिक से अधिक खर्च करके लोगों को यथा संभव काम दिया जाये। उन्होंने वर्ष 2013-14 में 100 दिन काम करने वाले परिवारों को इलाहाबाद बैंक की ग्रामीण स्वरोजगार योजना से जोड़ने के लिए निर्देशित किया।
बैठक में इंदिरा आवासो पर भी चर्चा हुई। महेबा ब्लाॅक में 21 और रामपुरा ब्लाॅक में 13 इंदिरा आवास हाल ही में आवंटित हुए हैं लेकिन एक के लिए भी उक्त ब्लाॅकों से कोई प्रस्ताव नही आया है। सीडीओ ने इस बात पर खंड विकास अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।






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