27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ceउरई। सब कुछ ठीक रहा तो प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना से पानी का संकट दूर हो जाएगा। इस योजना में बुंदेलखंड के दो जनपद जालौन और चित्रकूट को शामिल किया गया है। योजना में जल संरक्षण से संबंधित हर बिंदु पर विचार किया जायेगा। कितने पानी की जिले में खपत है और आगे कितनी खपत होगी इसको ध्यान में रखकर जिला कृषि योजना के तहत कार्ययोजना बनाई जायेगी। केवल सिचाई ही नहीं उद्योगों पर खपने वाले और पेयजल को भी इसमें शामिल रखा जायेगा। विभागों से कार्ययोजना भी मांग ली गयी है।
बुंदेलखंड में पानी की समस्या को देखते हुए यहां के दो जिले प्रधानमंत्री कृषि योजना में चयनित कर लिये गये हैं। इस योजना के तहत खेती किसानी में लगने वाले पानी के अलावा पेयजल और उद्योगों पर खर्च होने वाले पानी के आंकड़े एकत्रित किये जा रहे हैं। सिचाई में कितना पानी लगता है। पीने में पानी की खपत कितनी है और उद्योगों में कितना पानी व्यय होता है। इसकी जानकारी करने के बाद ही कार्ययोजना तैयार की जायेगी। वर्तमान वर्ष के अलावा आगामी वर्ष में पानी की कितनी जरूरत पड़ेगी इसको भी कार्ययोजना बनाये जाने में ध्यान रखना होगा। जिले में बारिश कितनी हुई, वर्षा जल का कितना संरक्षण किया जा सका। पानी को संरक्षित करने में क्या आवश्यकता है इन बिंदुओं को भी रखा जायेगा ताकि पानी के संकट को दूर करने की प्रभावी पहल हो सके। कृषि में पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए योजना में विशेष प्रयास होगा। ताकि यहां के किसानों को सिचाई के अभाव में फसलों के नुकसान का सामना न करना पड़े। बुंदेलखंड के खराब हालातों को देखते हुए ही पहले चरण में दो जनपद लिए गये हैं। आगे और जिले भी चयनित हो सकते हैं। उप कृषि निदेशक अनिल कुमार पाठक ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि योजना के तहत जिला स्तर पर जिला कृषि योजना बनाकर कार्य किया जाना है। योजना से केवल कृषि को ही फायदा नहीं होगा बल्कि उद्योग जगत में पानी की जरूरत और पीने के पानी की आवश्यकता को भी पूरा किया जायेगा। जल निगम, जल संस्थान, भूमि संरक्षण, लघु सिचाई, कृषि सहित कई विभागों से कार्ययोजना मांग ली गयी है। ताकि जल्दी ही योजना की शुरूआत की जा सके। उन्होंने बताया कि जिला कृषि सिचाई योजना के अध्यक्ष जिलाधिकारी रहेंगे।

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