जगम्मनपुर-उरई। पचनद की अथाह जलराशि छोड़कर मगरमच्छ के गांव के किनारे कीचड़ युक्त गडढे में बसेरा बना लेने से लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हो रहे हैं।
पिछले वर्ष पावस ऋतु में यमुना और उसकी सहायक नदियों में आई बाढ़ में बहकर एक शिशु मगरमच्छ मढ़ेपुरा गांव के किनारे पानी भरे गडढे में आ गया था। पहले गांव वाले सोचते रहे कि मगरमच्छ का शिशु आखिर में खुद ही यमुना में चला जायेगा क्योंकि विशाल जलराशि के बिना किसी मगरमच्छ का निस्तार संभव नही होता। लेकिन मगरमच्छ के शिशु ने गडढा नही छोड़ा। अब यह पूरा आकार ले चुका है। अपने स्वभाव के अनुरूप मगरमच्छ आहार के लिए बकरी या जंगली पशुओं को झपटट मारकर निगल जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी अधिक पड़ने से गडढे में पानी के नाम पर केवल कीचड़ रह गया है। इसके बावजूद शिकार के लिए मगरमच्छ नदी में जाकर फिर वापस गडढे में ही लौट आते हैं। ग्रामीण मगरमच्छ के आदमखोर बन जाने की आशंका को लेकर बुरी तहर डरे हुए हैं। क्षेत्र के जागरूक लोगों ने वन विभाग के स्थानीय कर्मचारियों को इस बारे में बताया लेकिन अभी तक मगरमच्छ को आबादी के पास से हटाकर नदी की गहराई में डालने के लिए कोई कार्रवाई नही की गई।







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