उरई। कदौरा ब्लाॅक अंतर्गत कन्या प्राथमिक विद्यालय चतेला की प्रधानाध्यापिका प्रियंका वर्मा से खंड विकास अधिकारी के निरीक्षण में अनुपस्थित मिलने के कारण किये गये जबाव तलब को लेकर पेशबंदी शुरू हो गई है। प्रियंका वर्मा ने खंड शिक्षाधिकारी पर उल्टे आरोप मढ़ डाले जबकि खंड शिक्षाधिकारी का कहना है कि प्रियंका वर्मा अक्सर बिना छुटटी के विद्यालय से गायब रहने की अभ्यस्त हैं। उनके पूर्व के अधिकारियों ने भी इस बात को लेकर उनके खिलाफ कदम उठाये थे।
खंड शिक्षाधिकारी ने बताया कि उक्त विद्यालय में मिडडे मील के मामले में भी अनियमितता और गबन की शिकायतें मिली। ग्रामीणों और बच्चों ने बताया कि प्रधानाध्यापिका कभी मिडडे मील नही बनवातीं। कागजी खानापूर्ति करके कन्वर्जन काॅस्ट और खाद्यान्न का प्रति माह बारा-न्यारा कर लिया जाता है।
मिडडे मील के मामले में एनपीआरसी उमा शंकर ने भी संदिग्ध स्थिति को पाया। उन्होंने जब भी निरीक्षण किया उनके कहने पर भी प्रधानाध्यापिका ने आय-व्यय के अभिलेख लेने से इंकार कर दिया जबकि एमडीएम तथा एसएमसी की पासबुक वे अपने पास रखे हुए हैं। उधर इसी आधार पर प्रधानाध्यापिका का कहना है कि उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। अभी तक उनकों पूरा चार्ज नही दिया गया है। उन्होंने खंड शिक्षाधिकारी पर रसोइये का मानदेय निकालकर हड़प जाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर खंड शिक्षाधिकारी का कहना है कि रसोइये को चैक के जरिया पेमेंट दिया गया है। जिसकी छायाप्रति प्रियंका वर्मा के पास उपलब्ध है। उनका कहना है कि अगर प्रियंका वर्मा के पास चार्ज न होता तो वे विद्यालय की रंगाई-पुताई के लिए भुगतान कैसे कर पातीं।
बहरहाल खंड शिक्षाधिकारी और प्रधानाध्यापिका की खींचतान से पूरे ब्लाॅक का माहौल खराब हो रहा है। जिलाधिकारी से अपेक्षा की गई है कि वे इसमें हस्तक्षेप कर जांच करायें तांकि इस प्रकरण को विराम लग सके और विद्यालयों का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।





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