cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngरामपुरा-उरई। भुखमरी की कगार पर खड़े परिवारों के लिए सरकार ने खाद्यान्न पैकेटों की व्यवस्था की है लेकिन उनके निवाले पर गांव के संपन्न गिद्ध टूटे पड़ रहे हैं। ब्लाॅक क्षेत्र के डिकौली जागीर गांव में अनाज और अन्य सामान का पैकेट हथियानें के लिए 25 बीघा के कास्तकार को भी भिखारी बनते शर्म नही आई।
सर्वें के नाम पर हुई कागजी खानापूरी के चलते फर्जी अंत्योदय कार्ड अभी भी सलामत बने हुए हैं। डिकौली जागीर गांव में ऐसा ही एक जाली कार्ड धारक है मुकुट जिसके पास न केवल 25 बीघा जमीन है बल्कि टैªक्टर भी है। सिंचाई की सुविधा के लिए उसने अलग-अलग जगह बटे अपने खेतों में दो नलकूंप लगवा रखे हैं। उसके पास गांव में भी पक्का मकान है और रामपुरा कस्बे के सुभाष नगर में उसने अलग पक्का मकान बनवा रखा है। इतना होते हुए भी वह गरीबों को बट रहे मुफ्त राशन को लेने का लालच नही छोड़ पाया। आश्चर्य यह है कि ऐसे फर्जी गरीबों को सूची से बाहर कर देने की जहमत खंड विकास अधिकारी से लेकर ग्राम पंचायत सचिव तक नही उठाना चाह रहे। दूसरी ओर तमाम ऐसे मोहताज लोग हैं जो कि षणयंत्रपूर्वक 2002 के सर्वें में गरीब सूची से बाहर रखे गये थे। उनके घर फाकाकशी हो रही है लेकिन कागजी पात्रता न होने की वजह से उनपर सरकार की रहमत नही पहुंच पा रही। जिले के उच्चाधिकारियों को भी इस मामले में न तो मानवता के नाते और न ही जिम्मेदारी के नाते उनके लिए कुछ करने की परवाह है।

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