उरई। किशोरी के साथ रेप के मामले में कोतवाली पुलिस लीपापोती में जुटी है। पीड़िता मंगलवार को दूसरे दिन अपनी मां के साथ कोतवाली आई तो उसे देखकर प्रभारी निरीक्षक को धैर्य टूट गया। उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को नजर अंदाज कर मां-बेटी को घुड़कते हुए कोतवाली से बाहर कर दिया।
नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के मामले में अदालत से लेकर सरकार तक बेहद संजीदगी बरत रही है। लेकिन खाकी पर इसका कोई असर नही है। गत् 22 मई को कोतवाली क्षेत्र के इटवा टिकटौली गांव में दिन दहाड़े 14 वर्षीय किशोरी को उसके घर के भीतर घुसकर शोहदे ने पकड़ लिया। किशोरी की मां खेत पर गई हुई थी। घर में अकेली दादी थी, जिनकी उम्र 80 वर्ष है जिन्हें न दिखाई देता है और न सुनाई देता है। किशोरी ने चींखकर गांव के लोगों को बुलाने की कोशिश की तो आरोपी चैनसुख ने उसके मुंह में कपड़ा भर दिया। किशोरी छटपटाती रही लेकिन बेबस होने के कारण वह अपने को युवक की हविश का शिकार होने से नही बचा सकी।
किशोरी की मां जब घर लौटी तो पीड़िता ने उसे अपने पर गुजरे वाकये के बारे में बताया। अगले दिन किशोरी को साथ लेकर उसकी मां कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने आई। लेकिन मुकदमा लिखने की बजाय उसे अगले दिन आने की कहकर टहला दिया गया। इस बीच पुलिस का आरोपी पक्ष से संपर्क हो चुका था जो कि गांव के लिहाज से मोटे आसामी हैं। उनसे अनुग्रहीत पुलिस ने आज किशोरी और उसकी मां के आने पर आरोपी के साथ वफादारी दिखाने में कोई कसर नही रहने दी। किशोरी को चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजने की बजाय प्रभारी निरीक्षक आलोक सक्सेना ने फतवा देने के अंदाज में कहा कि उनके दरोगा और उन्होंने अलग-अलग जांच की। यह लड़की झूठा आरोप लगा रही है। ऐसे मामलों में तपाक से मुकदमा लिखने के बाध्यकारी दिशा निर्देशों को बलाय ताक रख उन्होंने पीड़िता और उसकी मां को लगभग भगा देने के अंदाज में कोतवाली से बाहर कर दिया। कोतवाली के बाहर आंसू बहाते हुए पीड़िता की मां बोली कि कल वह पुलिस दफ्तर पहुंचकर बड़े साहब को दरख्वास्त देगी तब शायद उसके साथ इंसाफ हो सके।






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