कोंच-उरई। सरकार को दिखाने के लिए जिले के आला अफसर मीडिया के सामने और बैठकों में पंचायत निधि से हैंडपंप ठीक कराने के आदेश भर प्रधानों को देते है लेकिन इस पर अमल के लिए दबाव बनाने की जरूरत महसूस नही करते। इस रवैये की वजह से सूखे से कराहती बंुदेलखंड की जनता के आंसू पोछने के लिए राज्य सरकार की संवेदनशीलता दिखावा बनकर रह गई है।
विकास खंड के सबसे बड़े गांव में शुमार पिरौना में ग्राम पंचायत के रवैये की वजह से पेयजल का हाहाकार मचा है। लेकिन लोगों का क्रंदन आराम तलब जिला प्रशासन के अधिकारियों के कानों को नही सुनाई दे रहा। महेश मिश्रा के दरवाजे सहित लगभग 10 जगह के सरकारी हैंडपंप गांव में छोटी-मोटी कमी के कारण ठप्प हैं जिससे लोगों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी नापनी पड़ रही है। कम हैंडपंप चलने की वजह से हर एक नल पर भारी भीड़ रहती है। जिसमें अपनी बारी के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता हैं। यह स्थिति मारामारी की वजह बनती जा रही है फिर भी प्रशासन सचेत नही हो रहा।
प्रधान डिंपल पाॅलीवाल की टेंट से खराब हैंडपंप रिपेयर कराने के लिए एक धेला निकलना मुश्किल है। जबकि पंचायत निधि उनकी अपनी जागीर न होकर गांव के लोगों की दुख तकलीफ दूर कराने के लिए सार्वजनिक खजाने के बतौर उसके अधिकार में रहती है। खंड विकास अधिकारी से लेकर ग्राम पंचायत सचिव तक किसी को प्रधानों की मनमानी पर लगाम लगाने में कोई दिलचस्पी कमीशन भक्ति की वजह से नही है। जिले के आला अधिकारी भी इस ओर उदासीन हैं। अगर यही हालात रहे तो इस सूखे में नौतपा लोगों के लिए कितना दारुण हो जायेंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।






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