परिषदीय विद्यालयों में बन रहे मिड डे मील को खाने वालों का टोटा
konch1कोंच-उरई। बुंदेलखंड के जालौन को सूखाग्रस्त घोषित होने के कारण शासन द्वारा मिड डे मील ग्रीष्मावकाश में भी बनाने का फरमान जारी किया गया जिसका हालांकि शिक्षक संघों द्वारा विरोध किया गया लेकिन चूंकि फरमान सरकारी है सो मध्यान्ह भोजन तो स्कूलों को बनाना ही पड़ेगा। विकास खंड नदीगांव के परिषदीय विद्यालयों की अगर बात करें तो शासन के निर्देश पर सुबह 9 बजे से ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक के सहयोग से नियमित मिड डे मील का निर्माण हो रहा है जिसको व्यवस्थित ढंग से संचालित करवाने के लिये खंड शिक्षा अधिकारी नदीगांव विजय बहादुर सचान अपने सह समन्वयकों और एनपीआरसी की टीमों को लेकर करने में जुटे हुये हैं, लेकिन सही बात तो यह है कि इस स्कीम में बनने बाले भोजन को खाने बालों का खासा टोटा है और देखा जाये तो इसमें केवल वक्त और सामान की बर्बादी के अलावा और कुछ है नहीं। ग्रीष्मावकाश होने के कारण भोजन खाने बाले बच्चों की संख्या लगभग शून्य है। यहां बड़ा सवाल यह है कि ऐसी योजना का लाभ क्या जिसमें मुफ्त की वाहवाही लूटने के चक्कर में सरकार जनता की खून पसीने की गाढी कमाई को यों ही लुटाने में लगी है। शासन के आदेश निर्देश हैं सो प्रशासन के आला अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर सरकार का मुंह ताकने के अलावा और कुछ कर भी नहीं सकते हैं, अलबत्ता सही बात तो यह है कि भोजन हर हाल में बने का तुगलकी फरमान शिक्षकों के गले की फांस बना हुआ है। प्राथमिक शिक्षक संघ विकास खण्ड नदीगांव के अध्यक्ष कृष्णकांत वाजपेयी ने बताया है कि संघ के प्रदेशीय नेतृत्व के आह्वड्ढान पर जिला नेतृत्व द्वारा शासन को ज्ञापन दिया जा चुका है जिसमें शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश में एमडीएम से मुक्त रखने की मांग की गई है।

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