उरई। वित्त मंत्रालय के सचिव के नेतृत्व में चार सदस्यीय केंद्रीय टीम ने बुधवार को यहां पहुंचकर पहले कलेक्ट्रेट में अधिकारियों और किसान नेताओं से बात की। इसके बाद उन्होंने डकोर ब्लाॅक के सरसौखी और कदौरा ब्लाॅक के संदी ग्राम में मौके पर हालात देखे। ग्रामीणों ने मनरेगा में काम देने के लिए पैसे मांगे जाने जैसी गंभीर शिकायतों की झड़ी केंद्रीय टीम के सामने लगा दी। इससे जिले के अधिकारियों के चेहरे फक्क हो गये।
जिलाधिकारी संदीप कौर ने केंद्रीय टीम को बताया कि गत् वर्ष सितंबर के महीने में 39 मिलीमीटर की औसत बारिश के सापेक्ष केवल पांच मिलीमीटर बारिश हुई। उन्होंने कहा कि जिले में मिटटी बेहद सख्त हैं जिसकी वजह से सिचाई न होने पर पलेवा संभव नही होता। उन्होंने कहा कि कम बुबाई के अलावा हीट स्ट्रोक के कारण उपज में भी पचास प्रतिशत से ज्यादा घटोत्तरी हुई। गर्मी की वजह से कीट प्रकोप ने भी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। कीट प्रकोप इतना ज्यादा था कि दवाइयां इसे नियंत्रित करने में नाकाम रहीं। उधर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार और बुंदेलखंड अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने भी अपने नजरिये से केंद्रीय टीम के सामने जिले की तस्वीर रखी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड पैकेज के धन से मंडियों का निर्माण कराने की बजाय सिचाई संसाधन बढ़ाये जाने चाहिए और प्राकृतिक आपदा से व्यापक नुकसान की हालत में किसानों को फसल बीमा के लिए वसूला गया 22 प्रतिशत प्रीमियम तत्काल लौटाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब उपज ही नही होगी तो मंडी की क्या उपयोगिता है।
केंद्रीय टीम का नेतृत्व कर रहे वित्त मंत्रालय के सचिव आरबी पाॅल ने किसान नेताओं के कई तर्कों से सहमति प्रकट की। उन्होंने कहा कि अगर जिले में नहरों से केवल 60 दिन पानी मिल पाता है तो इसके कमांड एरिया को सिंचित नही कहा जा सकता। वर्ष में पूरे 365 दिन पानी की व्यवस्था वाले एरिया को ही सिंचित रूप में मान्य किया जाना चाहिए। टीम में ग्रामीण विकास मंत्रालय के अमित कुमार, पशुपालन के जीबी सिंह और नीति आयोग के रामानंद शामिल थे।






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