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* बकौल कृषि अधिकारी उड़द-मूंग नुकसान का बीमा क्लेम नहीं मिलेगा
* कृषि और राजस्व विभाग ने खेतों में जाकर फसल नुकसान की स्थिति परखी
कोंच। अतिवृष्टिï के चलते खरीफ की फसल भी किसानों के हाथों से निकल चुकी है और किसान की स्थिति कंगाली में आटा गीला जैसी हो गई है। बैसे तो कोंच तहसील में सौ फीसदी नुकसान हुआ है और किसान अपने उजाड़ खेतों को देख खून के आंसू पीने को मजबूर है, लेकिन यदि सरकारी विभागों की भी मान लें तो तिल में सत्तर से अस्सी फीसदी तक के नुकसान का अनुमान कृषि और राजस्व विभाग ने लगाया है। उपसंभागीय कृषि प्रसार अधिकारी दुर्गेश और तहसीलदार भूपाल सिंह ने गुरुवार को डेढ दर्जन गांवों में जाकर नुकसान का स्थलीय परीक्षण किया और माना कि सत्तर से अस्सी प्रतिशत नुकसान तिल की फसल में हुआ है। एसडीओ दुर्गेश का तिल के अलावा मूंग, उड़द जैसी फसलों को लेकर कहा कि इनका बीमा इस इलाके में नहीं हुआ लिहाजा इसका बीमा नहीं मिलेगा।
गत बर्ष अतिवृष्टिï और कहीं कहीं ओलावृष्टिï से अपनी फसल गंवाये बैठे किसानों के लिये खरीफ की फसल भी बर्बादी का वायस बन कर आई है। इलाके में अधिकांश रकवा तिल की फसल से आच्छादित हुआ था और इसी को मेन क्रॉप मान कर बीमा कंपनी ने तिल को बीमा के लिये अधिकृत किया था। धुवांधार बारिश ने तिल की फसल के अलावा कोंच एवं नदीगांव विकास खंडों में बोई गई उड़द, मूंग की फसलों को भी लील लिया और प्रकृति की इस दोहरी मार से किसान की कमर टूट गई। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पचास फीसदी से अधिक के नुकसान पर किसान को बीमा क्लेम दिये जाने का प्रावधान है जिसके चलते यद्यपि डीएम संदीप कौर के निर्देश पर एसडीएम गोरेलाल शुक्ला व तहसीलदार भूपाल सिंह निर्देशन में राजस्व विभाग की टीम ने प्लॉट टु प्लॉट सर्वे कर नुकसान की रिपोर्टें पहले ही तैयार कर ली थीं लेकिन अधिकारियों ने उन रिपोर्टों पर भरोसा करने से पहले नुकसान का स्थलीय परीक्षण कर लेना मुनासिब समझा। गुरुवार को उपसंभागीय कृषि प्रसार अधिकारी दुर्गेश, तहसीलदार भूपाल सिंह ने ग्राम डाढी, परैथा, कौशलपुर, मंगरा, सेता, चमेंड़, नरी, भेंपता, पहाडग़ांव, कमतरी, जमरोही कलां, बसोव, चांदनी, चंदुर्रा, घुसिया, महंतनगर सहित डेढ दर्जन गांवों में जाकर खेतों की स्थिति का जायजा लिया और किसानों से बातचीत की। कृषि अधिकारी के मुताबिक सत्तर से अस्सी फीसदी फसलें नष्टï हो गई हैं, यह आंकड़ा कहीं कहीं नब्बे और सौ फीसदी तक भी है, उड़द और मूंग में भी यद्यपि नुकसान बहुत है लेकिल इस इलाके में चूंकि तिल को किसानों ने मेन क्रॉप के रूप में अपनाया है जिसके चलते बीमा कंपनी ने भी इसी को क्लेम के लिये अधिकृत किया है सो केवल तिल का ही बीमा क्लेम मिलेगा। इस दौरान एसएमएस अशोककुमार निरंजन व तेजराम निरंजन भी मौजूद रहे।

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