IMG-20160905-WA0414माधौगढ़-उरई। माधौगढ़ तहसील फर्जी अस्पतालों का गढ़ बन गई है। गत दिनों सीएमओ ने कस्बे में बिना किसी डिग्री डिप्लोमा के लोगों द्वारा चलाये जा रहे नर्सिंग होम को सील किया था जिसमें रोजाना कई गर्भवतियों की डिलेवरी की जाती थी। इसी क्रम में सोमवार को ड्रग इंस्पेक्टर ने एक बंगाली क्लीनिक पर छापा मारा जिसमें बड़ी संख्या में अंग्रेजी दवाइयां मिलने के बाद क्लीनिक को सील कर दिया गया।
डीआई उमेश भारती आज कस्बे के दौरे पर आये। उन्हें सूचना मिली कि शिवकुमार घोष नाम का एक झोलाछाप डाॅक्टर बड़े बंगाली के नाम से क्लीनिक चला रहा है जिसमें हर तरह के मर्ज का इलाज किया जाता है। मजबूरी यह थी कि डीआई झोलाछाप डाॅक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकृत नही हैं लेकिन जब उनकी क्लीनिक की तलाशी में अंग्रेजी दवाइयों का बड़ा जखीरा मिला तो वे डीआई के चंगुल में फस गये। दवाइयों की बिक्री का लाइसेंस न होने पर इतनी ज्यादा दवाइयां इकटठी नही रखी जा सकती। डीआई ने इसके बाद नायब तहसीलदार विपिन कुमार को मदद के लिए बुलाया। जिन्होंने अपने हस्ताक्षर की सील लगाकर क्लीनिक पर ताला लगवा दिया।
बाद में पुलिस बुलवाकर बंगाली डाॅक्टर को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। थानाध्यक्ष मनोज यादव ने बताया कि सुसंगत धाराओं में शिवकुमार घोष के खिलाफ मुकदमा लिखा जा रहा है। उसे गिरफ्तार करके हवालात में डाल दिया गया है।
ज्ञात रहे कि गत वर्ष सीएमओ ने माधौगढ़ के 13 गोहन के 4 और ऊमरी के तीन फर्जी अस्पताल चिन्हित करके उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए एसपी से अनुरोध किया था। एसपी का पत्र पहुंचने के बाद भी संबंधित थानों ने सौदा पट जाने की वजह से आज तक इन क्लीनिकों को न तो बंद कराया है और न ही झोलाछाप डाॅक्टरों के खिलाफ मुकदमा लिखा है।

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