उरई। कालपी तहसील क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के छात्रों को पढ़ने के लिए खतरे के खिलाड़ी बनने का जोखिम उठाना पड़ रहा है। यह वाकया तहसील क्षेत्र के अंबेडकर गांव छौंक स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय का है। इस विद्यालय में लगभग ढाई सौ बच्चे पढ़ते हैं जिनके मां-बाप बच्चों के स्कूल वापस न आने तक धुकपुकी के बीच भगवान को याद करते रहते हैं।
छौंक पूर्व माध्यमिक विद्यालय रेलवे पटरी के ठीक किनारे बना हुआ है। इस विद्यालय की दो दशक पुरानी चाहरदीवारी जर्जर होकर गिर गई है। जिसके कारण बच्चे स्कूल से बाहर निकलकर पटरी पर खेलने लगते हैं। प्रधानाध्यापक सलमा बानो का कहना है कि स्कूल के पूरे समय उन्हें बच्चों की चैकसी करते बनता है। अगर किसी दिन कोई बच्चा उनके गौर न कर पाने पर ट्रेन आने के समय पटरी पर जा पहुंचा तो उनका क्या होगा इस अंदेशे से उनकी हालत खराब रहती है।
प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि वे अपनी तरफ से बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूल की नई बाउंड्री बनाने की गुजारिश कई बार कर चुके हैं। फिलहाल उन्होंने अपने स्तर से पटरी वाली साइड में तार लगवा दिये हैं तांकि बच्चे पटरी पर न पहुंच पायें। उधर चाहरदीवारी न होने के कारण मवेशियों ने स्कूल परिसर को अपना तबेला बना लिया है। मवेशियों से गंदगी फैलती है जिससे बच्चों के बीमार होने का खतरा अलग रहता है। बेसिक शिक्षाधिकारी प्रदीप कुमार पांडेय ने पूछने पर कहा कि बाउंड्रीवाल के लिए बजट नही आया है। बजट आते ही छौंक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कार्य करा दिया जायेगा।






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