उरई)।इसेदबंगों की दबंगई ही कहा जायेगा कि गांव के सार्वज्निक मरघट को कांजीहाउस में तब्दील कर उसमें आबारा पशुओं को बंद कर दिया जाता हैजिससे गांव के ग्रामीणों को अपने परिजन की अंत्येष्टि करने मेंपरेशानियों का सामना करने को विवश होना पड़ रहा है।
उरईतहसील क्षेत्र के ग्राम अकोढ़ी बैरागढ़ में आदर्श तालाब सेलगा हुआ सार्वजनिक मरघट है जहां सैकड़ों सालों से ग्रामीण अपने परिजनका निधन हो जाने के बाद अंतिम संस्कार करते हैं। लेकिन कुछ माह पूर्वगांव के दबंगों ने मरघट के चारों ओर लकड़ी के खंभे जमीन मेंलगाकर उसमें कटीले तार व कंटीले पेड़ों की जालियां लगाकर मरघट कोपूरी तरह से बंद कर उसे कांजी हाउस में तब्दील कर दिया जहां शामहोते ही गांव के पशुओं को हांककर वहां बंद कर दिया जाता है।इसके बाद ऐसे जानवरों को प्रातः में फिर से छोड़ दिया जाता है। लेकिनजिस तरह से शमशान स्थल को एक सैकड़ा से ज्यादा जानवरोंको बंद कर उसे काॅजी हाउस का रूप दिया गया है उससे पूरा मरघट परिसरगंदगी में से पट गया। ऐसी थिति में यदि किसी गांव के निवासी के परिजनका आकस्मिक निधन हो जाये तो फिर वह मरघट पर उसका अंतिम संस्कार करनेमें भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं मरघट को काॅजीहाउस में तब्दील करने के दबंगों के कारनामों पर गांव के ही कुछ लोगोंका कहना था कि यदि उन्हें वास्तव में इस तरह से आबारा पशुओंको बंद करना था तो वह गांव में खाली पड़ी खलिहान की जमीन पर भीइसी तरह की बाड़ लगाकर ऐसे जानवरों को बंद कर सकते थे जिससे मरघटका स्थान भी खाली रहता और ग्रामीणों को अपने परिजन की अंत्येष्टिकरने में भी परेशानियों का सामना न करना पड़ता। दबंगों केद्वारा मरघट को कांजी हाउस बनाये जाने से ग्रामीणों में आक्रोशदेखा जा रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मरघट को दबंगों सेमुक्त कराये जाने की मांग की है।






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